चेन्नई। तमिलनाडु सरकार के अधीन प्रतिष्ठित अन्ना विश्वविद्यालय में एक और यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद छात्रों में रोष व्याप्त है, जिसके बाद विभिन्न छात्र संगठनों ने शुक्रवार को परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर ज्ञानवेल बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी परिसर के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने मांग की कि प्रोफेसर को जांच लंबित रहने तक निलंबित रखा जाए और सभी छात्राओं के बयान दर्ज करने के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि पिछले दो वर्षों में प्रोफेसर के खिलाफ पीओएसएच (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम) के तहत दो शिकायतें दर्ज करायी गयी थीं, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव का हवाला देकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) पर निष्पक्ष जांच न करने और अपने लोगों को बचाने का आरोप लगाया।
एक छात्रा ने कहा कि हमारा कोर्स कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो रहा है। हम वर्षों से आवाज उठा रहे हैं। हम बिना उन्हें जवाबदेह बनाए पाठ्यक्रम पूरा नहीं करना चाहते। यह विरोध उस समय हुआ जब एक अंतिम वर्ष की छात्रा ने ग्रेटर चेन्नई सिटी पुलिस आयुक्त को याचिका देकर पिछले तीन वर्षों से लगातार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
छात्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने शुरू में शैक्षणिक मदद और पारिवारिक स्थिति का हवाला देकर विश्वास जीता, लेकिन बाद में अनुचित बातचीत और बार-बार फोन करने लगे। छात्रा ने शिकायत में कहा कि वह मुझे बार-बार फोन पर बात करने के लिए दबाव बनाता था और अनुचित तरीके से बातचीत करता।
छात्रा के अनुसार असहजता जताने और फोन व सोशल मीडिया पर ब्लॉक करने के बावजूद प्रोफेसर ने उसके मित्रों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने की कोशिश की। उसने यह भी दावा किया कि अन्य छात्राएं भी इसी प्रकार के व्यवहार की शिकार हुई हैं, लेकिन कई सामने आने से हिचक रही हैं। पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए मायलापुर के उपायुक्त को भेज दिया गया है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष के अन्नामलाई ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय की पीओएसएच समिति पिछले दो वर्षों से क्या कर रही थी।
उन्होंने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह इस घटना की पूरी तरह से, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे, इन-कैमरा (बंद कमरे में) कार्यवाही के दौरान उसके साथी छात्रों के विचार जाने, और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
यह जानने के लिए कि क्या कैंपस में यौन उत्पीड़न रोकथाम से जुड़ी आंतरिक शिकायत समिति वास्तव में काम कर रही थी, अन्नामलाई ने पूछा कि पिछले दो वर्षों से यह समिति क्या कर रही थी; और राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री गोवई चेझियन इसके लिए जनता के प्रति जवाबदेह थे।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 में इसी परिसर में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने भी व्यापक विवाद खड़ा किया था। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर बाद में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।



