चेन्नई। तमिलनाडु में कोयंबटूर की एक महिला अदालत ने नवंबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास कॉलेज छात्रा से हुए सनसनीखेज गैंगरेप के मामले में तीन दोषियों को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्यायाधीश वी सुंदरराज ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के मामले को साबित कर दिया है। उन्होंने पीड़िता के लिए सात लाख रुपये के मुआवजे की भी घोषणा की। अभियोजन पक्ष की महिला अधिवक्ता ने प्रसन्नता व्यक्त किया कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आया है। उन्होंने मात्र चार महीने में दोषियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष की सराहना करने पर न्यायाधीश का धन्यवाद किया।
तीनों आरोपी दक्षिण शिवगंगा जिले के मूल निवासी टी करुपासामी उर्फ सतीश (30), उसका भाई टी कालीस्वरन उर्फ कार्तिक और मदुरई का रहने वाला उनका रिश्तेदार एम गुना उर्फ थवासी (20) हैं।
गौरतलब है कि दो नवंबर-2025 की रात करीब 11:30 बजे छात्रा कोयंबटूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास कार में अपने दोस्त से बात कर रही थी। इसी दौरान शराब के नशे में धुत इस गिरोह ने छात्रा और युवक को कार से नीचे उतरने के लिए कहा। बदमाशों ने युवक पर धारदार हथियारों से हमला किया और छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
घायल युवक की शिकायत पर पीलमेडु के पुलिस थाना ने आठ धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस ने सघन तलाशी अभियान शुरू किया और अगली सुबह करीब 4 बजे लड़की को फटे कपड़ों में बचाया और एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। लड़की के दोस्त के सिर पर कटने के गहरे निशान थे, उसे इलाज के लिए कोयंबटूर के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अगले दिन जांच और 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण करने के बाद विशेष टीम ने उनके ठिकाने का पता लगाया और शहर के तुडियालुर क्षेत्र के पास वेल्लाकिनारु इलाके में पहुंचे। पुलिस को देखते ही तीनों ने उन पर हमला कर दिया, जिसके बाद आत्मरक्षा में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन पर गोलियां चलाईं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में एक हेड कांस्टेबल चंद्रशेखर भी घायल हो गए थे।
इस घटना से भारी राजनीतिक आक्रोश फैल गया। मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, पीएमके, भाजपा और टीएनसीसी ने घटना की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। गौरतलब है कि टीएनसीसी सत्तारूढ़ द्रमुक की सहयोगी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना को अमानवीय करार दिया। मुख्यमंत्री ने पुलिस को एक महीने के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने और उनके लिए अधिकतम सजा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
आरोप पत्र दाखिल होने के बाद दो फरवरी 2026 को मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई और 22 दिनों में पूरी हो गई। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 72 गवाहों का परीक्षण किया गया और आज फैसला सुनाया गया।



