अजमेर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से तैयार किए गए कैलेंडर का गुरुवार को सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि स्वदेशी का विचार भारतीय परम्परा में बीज रूप में प्राचीन काल से ही निहित रहा है। देशभक्ति के अमूर्त भाव का एक मूर्त स्वरूप स्वदेशी है। स्वदेशी भाव जागरण से ही भारत स्वावलंबी बन सकता है और अपनी संस्कृति, जीवन मूल्य, इतिहास और परंपराओं के प्रति उच्च कोटि का सम्मान और स्वाभिमान विश्व में प्रसारित कर सकता है। यही मूल भाव रहा है एबीआरएसएम के द्वारा प्रकाशित कैलेंडर का है।
इस कैलेंडर के माध्यम से शिक्षकों में भारत का स्वत्व भाव जाग्रत हो। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहना चाहिए कि हम अपनी जीवन शैली में उन महापुरुषों को स्मरण करते रहें जिनकी स्वातंत्र्य चेतना ने स्वदेशी के बीज को पराधीनता के कालखंड में अंकुरित किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पंचांग का विषय स्वत्व का आधार लेकर, भारती की जय करें रखा गया है। यही भारतीय महापुरुषों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार बहरवाल ने दिनांक 8-10 जनवरी को अलवर में आयोज्य वार्षिक अधिवेशन में सभी शिक्षक साथियों को भाग लेने का आह्वान किया तथा एबीआरएसएम के संघर्ष और विजय की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान उच्च शिक्षा के शैक्षिक प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो.अनिल कुमार दाधीच भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सभी संकाय सदस्यों को वार्षिक पंचांग वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनूप आत्रेय ने किया।




