मन की बात : प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों को धरती का सच्चा साधक बताया

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में देश के किसानों की मेहनत और नवाचार की सराहना करते हुये कहा कि हमारे देश के किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि धरती के सच्चे साधक हैं।

उन्होंने कहा कि आज का किसान परंपरा और तकनीक, दोनों को साथ लेकर चल रहा है। अब किसान सिर्फ ज्यादा उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन (गुणात्मक जुड़ाव) और नए बाजारों पर भी ध्यान दे रहा है।

मोदी ने ओडिशा के युवा किसान हिरोद पटेल का उदाहरण देते हुए कहा कि आठ साल पहले तक हिरोद पिता शिव शंकर पटेल के साथ पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। बाद में उन्होंने खेती को नए नजरिये से करते हुए तालाब के ऊपर जालीदार ढांचा बनाकर उस पर बेल वाली सब्जियां उगाईं। तालाब के आसपास केले, अमरूद और नारियल लगाए और तालाब में मछली पालन भी शुरू किया। इस तरह एक ही जगह पर धान, सब्जी, फल और मछली का उत्पादन हो रहा है। इससे जमीन और पानी का बेहतर उपयोग हुआ और आय भी बढ़ी। आज कई किसान उनका मॉडल देखने आते हैं।

मोदी ने इसी क्रम में केरल के त्रिसूर जिले के एक गांव का भी जिक्र किया, जहां एक ही खेत में 570 तरह की धान की किस्में उगाई जाती हैं। इनमें स्थानीय, हर्बल और दूसरे राज्यों से लाई गई किस्में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल खेती नहीं, बल्कि बीजों की विरासत को बचाने का अभियान है।

उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन चुका है। देश में 15 करोड़ टन से अधिक चावल का उत्पादन हो रहा है। भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ दुनिया की फूड बास्केट में भी योगदान दे रहा है।

मोदी ने यह भी बताया किसान अब कृषि उत्पाद हवाई मार्ग से विदेश भेजे जा रहे हैं। कर्नाटक के नंजनगुड केले, मैसूरु के पान के पत्ते और इंडी नींबू को मालदीव निर्यात किया गया है। इन उत्पादों को उनके स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और इन्हें जीआई टैग भी मिला है। उन्होंने कहा कि आज का किसान गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ा रहा है और वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

महाकुंभ, केरल कुंभ और जयललिता को याद किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ, केरल कुंभ और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को याद किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष महाकुंभ की अद्भुत तस्वीरें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं। संगम के तट पर उमड़ा जनसागर और आस्था का विशाल दृश्य भारत की सनातन चेतना का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि केरल के तिरुनावाया में भारतप्पुझा नदी के किनारे सदियों पुरानी परंपरा ‘मामंगम’ मनाया जाता रहा है, जिसे कई लोग केरल कुंभ या महा माघ महोत्सव भी कहते हैं। माघ महीने में पवित्र नदी में स्नान इसकी मुख्य परंपरा है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन करीब ढाई सौ वर्षों तक पहले जैसी भव्यता से नहीं हुआ, लेकिन अब इसे फिर से नई ऊर्जा के साथ आयोजित किया गया। बिना किसी बड़े प्रचार के श्रद्धालु बड़ी संख्या में तिरुनावाया पहुंचे।

उन्होंने कहा कि महाकुंभ हो या केरला कुम्भ, यह केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और स्मृति का जागरण है। नदियां अलग हो सकती हैं, लेकिन आस्था एक ही है – यही भारत की पहचान है।

मोदी ने 24 फरवरी को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की जयंती पर उन्हें याद करते हुये श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों का उनसे गहरा लगाव था और खासकर महिलाओं के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किए।

कानून-व्यवस्था सुधारने और सुशासन पर उनका विशेष ध्यान था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के रूप में दोनों के बीच सुशासन जैसे विषयों पर अक्सर चर्चा होती थी। जयललिता देशभक्ति और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाली नेता थीं।

मोदी ने दिवंगत जयललिता को याद करते हुए कहा कि उनकी सेवाएं हमेशा स्मरणीय रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसे नेता हमेशा जनता के दिलों में बसे रहते हैं, जिन्होंने समाज के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।