रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार’ कहना पूरे सिख समुदाय का अपमान : भाजपा

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ट्रेटर (गद्दार) कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस टिप्पणी को निंदनीय, आपत्तिजनक और सिख समुदाय की भावनाओं पर गंभीर आघात बताया।

भाजपा मुख्यालय में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आरपी सिंह और विधायक अरविंदर सिंह लवली ने एक स्वर में राहुल गांधी के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कांग्रेस को सिख विरोधी विचारों वाला बताया।

पुरी ने कहा कि आज वे केवल भाजपा नेता के रूप में नहीं, बल्कि सिख समुदाय के एक गहराई से आहत सदस्य के रूप में बोल रहे हैं। उन्होंने बताया कि संसद परिसर में राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के दौरान बिट्टू के गुजरने पर उनके लिए ‘ट्रेटर’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। पुरी ने कहा कि यह शब्द साधारण राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि राष्ट्रद्रोह से जुड़ा बेहद गंभीर शब्द है, जिसका इस्तेमाल जासूसों या देश को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए किया जाता है।

पुरी ने कहा कि बिट्टू केवल केंद्रीय राज्य मंत्री ही नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसने देश के लिए भारी बलिदान दिया है। उनके दादा सरदार बेअंत सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री थे, जिन्हें आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए गोलियों से भून दिया गया था। ऐसे परिवार के सदस्य को ‘गद्दार’ कहना न केवल शर्मनाक है, बल्कि पूरे सिख समुदाय का अपमान है। उन्होंने ने याद दिलाया कि इस समय देश नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिनका बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता और मानव गरिमा का प्रतीक है।

पुरी ने कहा कि सिख धर्म मानवता, समानता और सेवा का संदेश देता है। सिख समुदाय की जनसंख्या भले ही देश में लगभग दो प्रतिशत हो, लेकिन सशस्त्र बलों में उनका योगदान 20 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर किसी व्यक्ति को गद्दार कहा जाता है और दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि वह वापस आ जाएगा। यह विरोधाभास शब्दों का नहीं, बल्कि सोच का है, और यही सोच अतीत में 1984 जैसी त्रासद घटनाओं का कारण बनी।


भाजपा के आरपी सिंह ने राहुल गांधी पर विदेशों में भारत को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार यह झूठा दावा करते हैं कि भारत में सिखों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार होता है। उन्होंने कहा कि यह न केवल तथ्यहीन है, बल्कि समाज को बांटने वाला बयान है। सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस का कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के साथ कौन सा समझौता हुआ था और राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से मिले धन का पूरा विवरण देश के सामने क्यों नहीं लाया गया।

लवली ने कहा कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी कांग्रेस की उसी पुरानी राजशाही मानसिकता को दर्शाती है, जिसमें असहमति को देशद्रोह मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के दादा ने देश की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हों, उसी व्यक्ति को गद्दार कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब देश यह मानने लगा है कि राहुल गांधी संसद की गरिमा निभाने के भी योग्य नहीं हैं और जो व्यक्ति किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाता हो, उसका संसद में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

सिरसा ने इस बयान को सिखों के खिलाफ दशकों पुरानी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सिखों को कभी आतंकवादी, कभी अलगाववादी और अब गद्दार कहने की सोच अस्वीकार्य है। उन्होंने 1984 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सिखों के पवित्र स्थलों पर हमले किए गए, उन्हें जिंदा जलाया गया और अपमानित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने का अधिकार कांग्रेस को नहीं है।

सिरसा ने कहा कि राहुल गांधी ने स्वयं स्वीकार किया था कि उनकी दादी की मृत्यु के समय उनके मन में गुस्सा था और आज भी वही ज़हर उनकी सोच में दिखाई देता है। उन्होंने मांग की कि संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।