राजस्थान विश्वविद्यालय में ‘भारत बोध–आपणी माटी, आपणों खेल’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन

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जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में भारत बोध-आपणी माटी, आपणों खेल विषयक कार्यक्रम का भव्य, उत्साहपूर्ण एवं मनोरंजक आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय पारंपरिक खेलों के माध्यम से संस्कृति, राष्ट्रबोध और सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करने का सशक्त संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के खेल सचिव नीरज के. पवन (IAS) ने अपने संबोधन में पारंपरिक खेलों को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रबोध की आत्मा बताते हुए उनके संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे खेल न केवल शारीरिक विकास करते हैं, बल्कि सामूहिकता, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूत करते हैं।

खेल मंडल की सचिव डॉ. प्रतिभा सिंह रतनू ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को अपनी माटी, परंपरा और खेल संस्कृति से जोड़ना है। वहीं विशिष्ट अतिथि एवं क्रीड़ा भारती के क्षेत्रीय सह-संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने परंपरागत खेलों में भारत बोध विषय पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय खेल परंपरा राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से गहराई से जुड़ी हुई है।

खेल प्रतियोगिताओं में पुरुष वर्ग में सितोलिया की 8 टीमें, कबड्डी की 8 टीमें तथा रस्साकसी की 6 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं महिला वर्ग में सितोलिया की 8 टीमें, कबड्डी की 5 टीमें एवं रस्साकसी की 6 टीमों की सक्रिय सहभागिता रही, जिसने पारंपरिक खेलों में महिलाओं की सशक्त एवं प्रभावी भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित परिचर्चा सत्र में कुल 257 प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। परिचर्चा, खुले संवाद एवं सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का प्रेरणादायी समापन हुआ। अंत में शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।