नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के संयोजन में आयोजित समारोह में भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं पुस्तक का विमोचन किया।
इंद्रेश कुमार ने शनिवार को हरियाणा भवन में अपने संबोधन में वंदे मातरम को भारत की सांस्कृतिक और स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताते हुए कहा कि देश के लाखों मुसलमान गर्व के साथ गाते हैं। उन्होंने कहा कि इसका विरोध संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है और राष्ट्रगीत को अस्वीकार करना उस साझा विरासत से दूरी बनाना है जिसने भारत को एक सूत्र में जोड़ा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र पहले है, राजनीति बाद में।
इंद्रेश ने बांग्लादेश की स्थिति पर कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से वहां की जड़ें भारतीयता से जुड़ी हैं और क्षेत्रीय शांति के लिए भारत-बांग्लादेश सहयोग अनिवार्य है। उनके अनुसार भारत से सकारात्मक संबंध ही वहां स्थायी शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
जाने माने लेखक याजवेंद्र यादव द्वारा लिखी भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं पुस्तक को वक्ताओं ने भारत की साझा राष्ट्रीय विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम, सेना, शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में भारतीय मुसलमानों के योगदान को रेखांकित किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यह कृति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में सहायक होगी।
डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी विविधता और संविधान के प्रति निष्ठा में निहित है तथा शिक्षा सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है, जो कट्टरता और वैचारिक टकराव को कम कर सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने से बचने की भी अपील की।
डॉ. शालिनी अली ने सहअस्तित्व और पारस्परिक सम्मान को भारतीय समाज की पहचान बताते हुए बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों पर चिंता जताई और मानवाधिकारों के प्रश्न पर समान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विमोचन से पूर्व मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें जनजागरण अभियान, सद्भाव यात्राएं, युवा संवाद और राष्ट्रवादी मूल्यों पर आधारित परिचर्चाओं को तेज करने का निर्णय लिया गया। बैठक में देशभर से लगभग 150 पदाधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में शिक्षाविद फिरोजबख्त अहमद, मोहम्मद अफजाल, गिरीश जुयाल, अबू बकर नकवी, सैयद रजा हुसैन रिज़वी, शाहिद सईद, इमरान चौधरी, हाफिज साबरीन, रेशमा हुसैन और एसके मुद्दीन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह से यह संदेश दिया गया कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और साझा सांस्कृतिक प्रतीकों के सम्मान पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है और “नेशन फर्स्ट” केवल नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है। इस अवसर पर देशभर से बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। समारोह की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम गान से हुई, जिसने कार्यक्रम की राष्ट्रवादी भावना को रेखांकित किया।



