इजराइली हमलों से दहला ईरान, सर्वोच्च नेता खामेनेई के कार्यालय को बनाया निशाना

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तेहरान। इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों में हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इन हमलों की जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि इजराइल ने अपने खिलाफ खतरों को समाप्त करने के लिए ईरान पर एहतियाती हमला किया है।

ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी में कम से कम तीन धमाकों की आवाज सुनी गयी और कुछ हिस्सों में धुआं उठता देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम एक हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई से जुड़े कार्यालयों के निकट हुआ। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अर्ध-आधिकारिक फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जुमहूरी इलाके के आसपास मिसाइलें गिरीं। सरकारी कार्यालयों वाले रिपब्लिक क्षेत्र में भी विस्फोट की सूचना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमरीका और ईरान के बीच परमाणु मसले पर बातचीत का तीसरा दौर कल ही खत्म हुआ है।

इस बातचीत के समाप्त होने पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संवाददाताओं से कहा था कि वह ईरान के साथ बातचीत की प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

खामनेई , पेजेश्कियान स्वस्थ और सुरक्षित: अराघची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान पर हमलों में देश सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के मारे जाने की रिपोर्टों को खंडन किया है और कहा कि दोनों नेता सकुशल और सुरक्षित है।

अराघची ने अमरीकी टीवी समाचार चैनल एनबीसी न्यूज के साथ बातचीत में कहा कि इस्लामिक क्रांति के नेता (खामनेई) और राष्ट्रपति पेजेश्कियान सुरक्षित और स्वस्थ हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान सरकार के अधिकतर बड़े अधिकारी भी सुरक्षित है। पर उन्होंने कहा कि इन हमलों में एक-दो कमांडर जरूर शहीद हो गए हैं।

अमरीका और इजराइल ने ईरान पर अमरीकी समय के अनुसार शुक्रवार रात हमले शुरू कर दिए। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि ईरान के शीर्ष नेता, राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री मारे गए हैं। सूत्रों के अनुसार अमरीकी अधिकारियों ने ईरान से फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु प्रतिष्ठानों को बंद करने तथा यूरेनियम देश से बाहर भेजने की मांग की थी, जिसे तेहरान ने स्वीकार नहीं किया।