अमरीकी पायलट बचाव अभियान विफल, दो हेलीकॉप्टर नष्ट : ईरान

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तेहरान। ईरान ने कहा कि पायलट को बचाने का अमरीकी अभियान विफल रहा और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 सहायक विमान को मार गिराया गया। यह जानकारी ईरानी सैन्य कमान के केंद्रीय मुख्यालय खातम अल-अनबिया के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने रविवार को दी।

ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार ज़ोल्फ़ागरी ने कहा कि दुश्मन द्वारा दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलट को बचाने के प्रयास विफल रहे हैं। इस्फ़हान के दक्षिण में, दुश्मन के हवाई ठिकानों को नष्ट किया गया, जिनमें दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 सैन्य परिवहन विमान शामिल हैं। वे अब आग की चपेट में हैं।

इससे पहले, प्रेस टीवी प्रसारक ने रविवार को कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इस्फ़हान के दक्षिण में एक अमरीकी विमान को रोककर नष्ट करने की घोषणा की, जो पहले से ही दुर्घटनाग्रस्त एफ-15ई लड़ाकू विमान के पायलट की तलाश कर रहा था।

प्रसारक ने ईरानी वायु रक्षा विभाग के एक बयान का भी हवाला दिया जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने एक इजराइली हर्मेस-900 ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। शनिवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान में गिराए गए एफ-15ई विमान को बचा लिया गया और वह सुरक्षित है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस अभियान में दर्जनों विमान शामिल हुए।

28 फरवरी को अमरीका और इज़राइल ने तेहरान सहित ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे बहुत नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमरीकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया।

अमरीका और इज़राइल ने शुरू में दावा किया कि उनका पूर्व-नियोजित हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न होने वाले कथित खतरे को रोकने के लिए आवश्यक था लेकिन जल्द ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।

ईरान में हवाई हमले में रेड क्रिसेंट स्वयंसेवक की मौत

ईरान के इस्फहान प्रांत में 4 अप्रैल को हुए एक हवाई हमले में अब्दुलफज़्ल देहनवी नामक 20 वर्षीय स्वयंसेवक की मौत हो गई। वह ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के साथ मानवीय सहायता कार्यों में जुटे हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला मोबारकेह काउंटी में हुआ, जहां देहनवी नागरिकों की मदद और राहत कार्यों में लगे थे। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवार, सहयोगियों और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई है।

बताया गया है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के दौरान अमेरिकी-इजरायली हमलों में देहनवी की जान गई। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से अब तक चार रेड क्रिसेंट स्वयंसेवकों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। सभी कर्मी नागरिकों को राहत पहुंचाने और हमलों के बाद बचाव कार्यों में लगे हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस घटना को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि मानवीय कार्यों में लगे लोगों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहतकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।

संगठनों ने कड़े शब्दों में अपील की है कि मानवीय कर्मियों की हत्याएं तुरंत रोकी जाएं और उन्हें सुरक्षित वातावरण में काम करने की गारंटी दी जाए।
इस घटना के बाद एक बार फिर युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में काम कर रहे राहतकर्मियों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता गहरा गई है।

ईरान में लगातार 37 दिनों से इंटरनेट बंद

ईरान में इंटरनेट बंदी ने अब तक के सभी वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंटरनेट की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘नेटब्लॉक्स’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में जारी ‘इंटरनेट ब्लैकआउट’ अब तक किसी भी देश में दर्ज की गई दुनिया की सबसे लंबी राष्ट्रव्यापी इंटरनेट बंदी बन गई है।

नेटब्लॉक्स के मुताबिक ईरान में इंटरनेट सेवाओं को बंद हुए लगातार 37 दिन (864 घंटे) बीत चुके हैं। गंभीरता और समय सीमा के मामले में इसने दुनिया की ऐसी अन्य सभी घटनाओं को पीछे छोड़ दिया है।

गौरतलब है कि ईरान में यह सख्त कदम वहां उपजे गंभीर सुरक्षा हालात और राजनीतिक अस्थिरता के बीच उठाया गया है। लगातार इतने दिनों से संचार ठप होने के कारण आम नागरिकों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय इंटरनेट के बंद होने से न केवल देश की अर्थव्यवस्था, बल्कि आम लोगों के जनजीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है।