
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सत्ता बदलने के बाद पहली बार सिरोही मुख्यालय की सड़कों पर कोई कलेक्टर उतरा है। चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ तो सबसे पहले शुभम चौधरी को यहां जिला कलेक्टर बनाया गया। इनके बाद अल्पा चौधरी ने कार्यभार संभाला। लेकिन, गहलोत सरकार में बिगड़ी सिरोही की गवर्नेन्स कभी सुधरी नहीं। जिला मुख्यालय पर भी बदहाली पसरी रही लेकिन, दोनों कलेक्टर कभी इसकी सुध लेने नहीं पहुंचे। बेड गवर्नेंस से सिरोही जिला मुख्यालय समेत पूरे जिले में सरकार की साख भी खराब होती गई। नये जिला कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर ने कार्यभार संभालते ही दूसरे दिन रविवार को जिला मुख्यालय की सुध ली।

– बदहाल व्यवस्था को देखा
जिला कलेक्टर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा निर्धारित जिला स्तरीय यातायात समिति के अध्यक्ष भी होते हैं। इनके ऊपर जिले में बदहाल यातायात व्यवस्था की वजह से हादसे रोकने की जवाबदेही भी है। जिला मुख्यालय पर ही प्रमुख सड़कों और चौराहों पर अतिक्रमी और कॉम्प्लेक्सो में पार्किंग की वजह अवैध वसूली दुकानें बना देने का कारण पार्किंग व्यवस्था बदहाल है। चौराहों के मोड़ पर नियम विरुद्ध वाहनों को खड़े होने से यहां हादसों का डर हमेशा बना रहता है।
कलेक्टर ने रविवार को ही सिरोही जिला मुख्यालय का भ्रमण किया। सीवरेज, पार्किंग और अतिक्रमण को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। अन्नपूर्णा रसोई का भी निरीक्षण किया। वहां पर निर्धारित प्लेट्स में खाना नहीं परोसने के कारण दस हजार रुपए का जुर्माना किया। शहर की सफाई व्यवस्था भी देखी। गंदगी देख नगर परिषद अधिकारियों को तुरंत सफाई करवा के निर्देश दिए।
पहली बार कोई कलेक्टर शहर के सड़ांध मारते यूरिनल को भी देखने गए। शहर की बदहाली देखकर जिला कलेक्टर ने एसआई से तुरंत उन्हें और उपखंड अधिकारी को सफाई व्यवस्था के लिए बनाए गए व्हाट्स एप ग्रुप में जोड़ने को कहा। उन्होंने दिन में दो बार यूरिनल की सफाई करवाकर इसके फोटो समूह में डालने के निर्देश दिए। उन्होंने इनकी सफाई की नैतिक जिम्मेदारी नगर परिषद के साथ व्यापारियों पर भी डाली।
– सिलेंडर पर कार्रवाई लेकिन कॉमर्शियल के लिए परेशान व्यापारी
जिला कलेक्टर ने जिले के हर उपखंड में गैस को लेकर निरीक्षण के निर्देश दिए। इसके बाद रविवार को कई जगहों पर जांच की गई। कई स्थानों पर कॉमर्शियल जगहों पर घरेलू गैस उपयोग होता मिलने पर कार्रवाई भी की। जिले में घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर तो स्पष्ट निर्देश सरकार की तरफ से आ रहे हैं। लेकिन, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर नियमित निर्देश नहीं आने से छोटे व्यापारी दुकानदार परेशान हो रहे हैं।
माउंट आबू में तो कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई के लिए गैस एजेंसी की तरफ से ही रोटेशन व्यवस्था कर देने से व्यापारियों को ये पता है कि उनका अगला सिलेंडर कब मिलेगा। लेकिन , आबूरोड में इसको लेकर अब भी स्थिति विकट है। जिला प्रशासन की तरफ कॉमर्शियल सिलेंडर को लेकर कोई मार्गदर्शन सार्वजनिक नहीं होने से भी लोग अनभिज्ञ हैं कि आखिर उनके लिए व्यवस्था क्या है। सूत्रों के अनुसार गैस पेट्रोल की निरीक्षण व्यवस्था सरकार द्वारा सीधे गैस और पेट्रोल कंपनी को देने से जिला प्रशासन का इन पर नियंत्रण लगभग सीमित हो गया है। ऐसे में भी लोगों को समस्या सामना करना पड़ रहा है।


