मोदी के किफायत बरतने के आह्वान का देशभर में स्वागत, कई मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों ने काफिले का आकार घटाया

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किफायती उपाय अपनाने के आह्वान के बाद अब कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों ने अपने आधिकारिक वाहनों की संख्या में कटौती कर दी है।

सरकार के भीतर खर्चों को नियंत्रित करने के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं के काफिले के आकार में काफी कमी की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वाहनों की संख्या में यह कटौती विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों को पूरी तरह सुनिश्चित रखते हुए ही की गई है।

सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रधानमंत्री के काफिले में पायलट वाहन, एस्कॉर्ट गाड़ियाँ, प्रधानमंत्री की मुख्य कार, एक बैकअप वाहन, एम्बुलेंस व मेडिकल इमरजेंसी वाहन और एक उच्च तकनीक वाला संचार वाहन शामिल होता है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने यह निर्देश भी दिया है कि बिना कोई नया वाहन खरीदे, मौजूदा बेड़े में जहां भी संभव हो, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए।

प्रधानमंत्री ने रविवार को आम नागरिकों से भी ईंधन की खपत कम करने और अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री की इस अपील का पूरे देश में असर देखा जा रहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने अपने काफिले को वाहनों को काफी कम कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने की प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया है। उन्होंने अपने दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे के दौरान अपने आधिकारिक काफिले के आकार को 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री की अपील से प्रेरित होकर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक अनुकरणीय पहल की है। प्रोटोकॉल के तहत उपलब्ध एस्कॉर्ट और पायलट वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद उन्होंने अपनी कार स्वयं चलाकर यात्रा की।

मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या अगले आदेश तक 13 से घटाकर केवल आठ कर दी जाएगी। इसके साथ ही उनके दौरों के दौरान निकलने वाली वाहनों की रैलियों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसी दिशा में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी कड़े निर्देश जारी किए हैं कि सुरक्षा और अन्य आधिकारिक उद्देश्यों के लिए किसी भी प्रकार के अनावश्यक वाहनों का उपयोग कतई न किया जाए।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को जनता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुझाए गए मितव्ययिता के उपायों का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में खर्च में कटौती के इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जल्द ही एक विस्तृत कार्ययोजना घोषित की जाएगी।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी पश्चिम एशिया के हालातों से उत्पन्न वैश्विक तेल संकट के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है। देशव्यापी मितव्ययिता उपायों के आह्वान पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपने निजी सुरक्षा काफिले में वाहनों की संख्या को आधा करने का निर्णय लिया है।

दिल्ली में भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि कैबिनेट मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी अब आवश्यकतानुसार केवल न्यूनतम वाहनों का ही उपयोग करेंगे और संसाधनों के कुशल प्रयोग के लिए कार पूलिंग को सक्रिय रूप से बढ़ावा देंगे।

महाराष्ट्र सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने के उद्देश्य से गैर-जरूरी हवाई यात्राओं पर तत्काल रोक लगा दी है। अब मंत्रियों को सरकारी विमान का उपयोग करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने काफिले के वाहनों की संख्या को आधा करने का ऐलान कर दिया है।

वहीं, गुजरात के राज्यपाल ने एक प्रेरणादायक घोषणा की है कि वे राज्य के भीतर यात्राओं के लिए हेलीकॉप्टर या विमान के स्थान पर अब ट्रेन और बस जैसे सार्वजनिक साधनों का उपयोग करेंगे।

प्रधानमंत्री की अपील के बाद अब बिहार में भी मुख्यमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या कम की जाएगी। राज्य के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे कार्यक्रमों में बिना किसी अतिरिक्त वाहन के शामिल हों। इसके साथ ही, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के स्थान पर मेट्रो, बस और ऑटो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक स्तर पर संसाधनों की बचत के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अपने स्वयं के काफिले के साथ-साथ मंत्रियों और नौकरशाहों की गाड़ियों की संख्या में 50 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है।

इसके अतिरिक्त, राज्य में सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने और सरकारी बैठकों को 50 प्रतिशत तक ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का भी विशेष आग्रह किया है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई अपील का सम्मान करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। डॉ. सिंह ने अपने आधिकारिक प्रोटोकॉल काफिले से चार वाहनों को कम करने का फैसला किया है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री साय ने भी स्पष्ट किया है कि उनके आधिकारिक भ्रमणों के दौरान अब कारकेड में केवल अत्यंत आवश्यक वाहनों को ही शामिल किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने मंत्रियों और विभिन्न निगम-मंडलों के पदाधिकारियों से सरकारी संसाधनों एवं वाहनों के संयमित उपयोग का आह्वान किया है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने आधिकारिक वाहनों की संख्या को आधा कर दिया है और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही आधिकारिक यात्रा करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए अपनी प्रस्तावित अमरीका यात्रा को रद्द करने का फैसला किया है।

ईंधन बचत के संदेश को धरातल पर उतारने के लिए मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर स्वयं ई-स्कूटर चलाते नजर आए, वहीं लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ने सरकारी गाड़ी का त्याग कर ई-रिक्शा से सफर करना शुरू कर दिया है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी सरकारी कामकाज के लिए मेट्रो और ई-रिक्शा का सहारा ले रहे हैं ताकि समाज में ईंधन संरक्षण का सकारात्मक संदेश दिया जा सके।

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में अभिनव पहल की है; कवर्धा सहित कई जिलों में एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों ने अपनी सरकारी गाड़ियाँ छोड़कर साइकिल से दफ्तर जाना शुरू कर दिया है।

बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रधानमंत्री की अपील का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जहां प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार बुधवार सुबह साइकिल चलाकर अदालत पहुंचे। जिला जज कुमार ने यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट और अमरीका-ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश के समर्थन में उठाया है। यह पहल न्यायपालिका की ओर से समाज में पर्यावरण और संसाधन संरक्षण के प्रति एक प्रेरक संदेश देती है।