अलवर : जमीन के अभाव में अटका सरिस्का के 6 गांवों का विस्थापन

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अलवर। राजस्थान में अलवर के सरिस्का बाघ अभयारण्य में बसे गांवों के विस्थापन की महत्वाकांक्षी योजना जमीन की कमी के कारण धीमी पड़ गई है।

बाघों की सुरक्षा और वन क्षेत्र को मानव हस्तक्षेप से मुक्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। 24 गांवों में से 11 गांवों का प्राथमिकता के आधार पर विस्थापन होना था लेकिन अब तक केवल पांच गांव ही पूरी तरह विस्थापित हो पाए हैं, जबकि शेष छह गांवों में प्रक्रिया जारी है।

सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने मंगलवार को बताया कि विस्थापन कार्य लगातार जारी है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि सुकोला गांव का विस्थापन अंतिम चरण में है। यहां प्रारंभ में 48 परिवार चिन्हित किए गए थे, जिनमें से केवल एक परिवार का पुनर्वास शेष है।

कटियार ने बताया कि क्रास्का गांव का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और इसके विस्थापन के लिए मलियारजट क्षेत्र में पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। वहीं देवरी गांव के लिए लक्ष्मणगढ़ तहसील में 202 हेक्टेयर सरकारी भूमि चिन्हित की गई है। इस भूमि के परिवर्तन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही देवरी गांव के विस्थापन का रास्ता साफ हो जाएगा।

इसके अलावा खैरथल-तिजारा क्षेत्र के घाट सहित क्षेत्रों के कई गांवों में करीब 1200 हेक्टेयर सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। इसके लिए संबंधित जिला कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा गया है। राज्य सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद यह भूमि विस्थापित परिवारों को आवंटित की जाएगी।

सरिस्का में वर्ष 2004 में बाघों के पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद वर्ष 2008 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की देखरेख में रणथंभौर से बाघ लाकर उनका पुनर्वास किया गया था। इसके बाद एनटीसीए ने निर्देश दिए कि अभयारण्य के भीतर बसे गांवों को चरणबद्ध तरीके से बाहर बसाया जाए ताकि बाघों को सुरक्षित और निर्बाध आवास मिल सके।

दरअसल, वर्ष 2004 में शिकारियों की घुसपैठ और मानव गतिविधियों के कारण सरिस्का के सभी बाघ खत्म हो गए थे। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदली गई। वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई, शिकारियों पर सख्त कार्रवाई की और पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था मजबूत की। इसी योजना के तहत अब तक पांच गांवों का विस्थापन करके उन्हें बहरोड़ और मौजपुर रुंध क्षेत्र में बसाया जा चुका है।

सरिस्का में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन अभ्यारण्य के भीतर बसे गांवों का समय पर विस्थापन नहीं होने से संरक्षण की योजना प्रभावित हो रही है। वन विभाग का कहना है कि जैसे ही सरकार से भूमि आवंटन और मार्ग परिवर्तन की मंजूरी मिलेगी, शेष गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।