नसीराबाद : 39 करोड़ का रेलवे ओवरब्रिज, चंद महीनों में सड़क बदहाल

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बारिश ने खोल दी निर्माण गुणवत्ता की पोल
ओवरब्रिज पर हुए गड्ढे दे रहे हादसे को न्यौता
नसीराबाद। अजमेर जिले के नसीराबाद में रेलवे समपार फाटक पर करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किया गया नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज अब अपनी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। करीब 39.38 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए ओवरब्रिज पर आवागमन शुरू हुए चंद माह भी नहीं बीते है कि सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है। मानसून की बारिश के बाद हालात और बिगड़ गए हैं तथा सड़क पर गड्ढे और मलबे के ढेर के कारण वाहन हिचकोले खाते हुए हादसे को न्योता दे रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ओवरब्रिज का निर्माण लोगों को वर्षों की परेशानी से निजात दिलाने के लिए किया गया था, उसकी सड़क इतनी कम अवधि में ही बदहाल कैसे हो गई?

6 साल से ज्यादा इंतजार, फिर भी नहीं मिली मजबूत सड़क

नसीराबाद रेलवे फाटक पर बार-बार जाम और आवागमन में होने वाली परेशानी को देखते हुए क्षेत्रवासियों की लंबे समय से ओवरब्रिज की मांग थी। घोषणा के बाद निर्माण शुरू हुआ, लेकिन रक्षा भूमि विवाद और विभिन्न तकनीकी अड़चनों के कारण प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब छह साल से अधिक का समय लग गया।

रेलवे ने अक्टूबर 2019 में निर्माण का कार्यादेश ठेकेदार फर्म विष्णुप्रकाश आर. पुंगलिया को जारी किया था। लंबी कवायद के बाद वर्ष 2026 में ओवरब्रिज बनकर तैयार हुआ। इसके बाद 18 मई को बिना औपचारिक उद्घाटन के आवागमन शुरू कर दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब रेलवे फाटक के कारण होने वाली परेशानी खत्म होगी, लेकिन सड़क की हालत ने नई चिंता खड़ी कर दी।

20-25 दिन में ही दिखने लगे सड़क पर गड्ढे

स्थानीय लोगों के अनुसार आवागमन शुरू होने के करीब 20-25 दिन बाद ही सड़क के कई हिस्सों में पेवरीकरण उखड़ने लगा था। धीरे-धीरे गड्ढे बढ़ते गए और वाहन चालकों को परेशानी होने लगी।

क्षतिग्रस्त सड़क को देखकर संबंधित ठेकेदार की ओर से कुछ स्थानों पर पेंचवर्क कर गड्ढों को भरने का प्रयास किया गया। हालांकि बारिश शुरू होते ही यह मरम्मत भी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी।

अब कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ी हुई है और गड्ढों के साथ मलबा जमा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी बनी हुई है।

बारिश ने बता दिया सड़क की मजबूती का सच

मानसून की बारिश ने ओवरब्रिज की सड़क के निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों को और गंभीर कर दिया है। जिन स्थानों पर पेंचवर्क किया गया था, वहां भी सड़क की स्थिति खराब होने की बात सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता और मानकों का पालन किया गया होता तो इतने कम समय में सड़क की यह हालत नहीं होती। अब लोगों की मांग है कि सड़क की तकनीकी जांच और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

राजस्थान सरकार और रेलवे ने लगाए 39.38 करोड़

यह ओवरब्रिज साझाकरण योजना के तहत तैयार किया गया है। परियोजना की कुल लागत करीब 39.38 करोड़ रुपए है। इसमें राजस्थान सरकार का हिस्सा 21.19 करोड़ रुपए, जबकि रेलवे की ओर से 18.19 करोड़ रुपए का अंशदान निर्धारित किया गया था।

ओवरब्रिज बनने से राजकीय नसीराबाद महाविद्यालय, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, राजौसी, भवानीखेड़ा, बिठूर, राजगढ़, खापरी, चैनपुरा सहित आसपास के कई क्षेत्रों के लोगों को रेलवे फाटक और जाम की समस्या से राहत मिलनी थी।

करोड़ों के प्रोजेक्ट पर अब उठ रहे पांच बड़े सवाल

पहला सवाल: आवागमन शुरू होने के महज 20-25 दिन में सड़क क्यों उखड़ने लगी?

दूसरा सवाल: क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की पर्याप्त जांच हुई थी?

तीसरा सवाल: क्या सड़क का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया?

चौथा सवाल: शुरुआती पेंचवर्क के बावजूद सड़क दोबारा क्यों क्षतिग्रस्त हुई?

पांचवां सवाल: करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट की खराब सड़क के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

अब जांच की जरूरत, जिम्मेदार चुप्पी तोडें

ओवरब्रिज की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने रेलवे और राज्य सरकार से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल गड्ढों पर पैबंद लगाने के बजाय सड़क की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए और यदि निर्माण में लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।