अजमेर निकाय चुनाव : ज्ञान सारस्वत के यू-टर्न से बदले सियासी समीकरण

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भाजपा-कांग्रेस की टिकट सूची से पहले बड़ा उलटफेर
वीडियो जारी कर बोले- मैं और मेरे परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा, वार्ड 1 से 3 तक चल रही थी दावेदारी की चर्चा

अजमेर। नगर निगम चुनाव के नामांकन के बीच अजमेर की सियासत में बड़ा उलटफेर सामने आया है। भाजपा के पूर्व पार्षद एवं अजमेर उत्तर की राजनीति में प्रभाव रखने वाले ज्ञान सारस्वत ने वीडियो जारी कर साफ कर दिया है कि वे स्वयं और उनके परिवार का कोई भी सदस्य वर्ष 2026 का नगर निगम चुनाव नहीं लड़ेगा। इसके साथ ही पिछले कई दिनों से उनके और उनके परिवार के संभावित चुनाव लड़ने को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।

ज्ञान सारस्वत के इस फैसले को अजमेर उत्तर के चुनावी समीकरणों में अहम बदलाव माना जा रहा है। दरअसल, आरक्षण के बाद उनके पुराने वार्ड की स्थिति बदल गई थी। इसके बाद उनके वार्ड 1 से तथा उनकी बेटी हर्षिता के वार्ड 3 से चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज हुई थीं। नामांकन फार्म लिए जाने की खबरों के बाद यह माना जा रहा था कि सारस्वत परिवार इस बार निकाय चुनाव में सीधे मुकाबले में उतर सकता है।

हालांकि अब ज्ञान सारस्वत के वीडियो संदेश ने पूरा घटनाक्रम बदल दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव में उनका या परिवार के किसी सदस्य का कोई प्रत्याशी नहीं होगा।

हेमा गहलोत के मैदान में रहने से वार्ड-4 बना हॉट सीट

ज्ञान सारस्वत के चुनाव से हटने के बीच अजमेर उत्तर का वार्ड नंबर 4 अब भी सबसे चर्चित वार्डों में बना हुआ है। भाजपा के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत के भाजपा से इस्तीफे के बाद उनकी पत्नी हेमा गहलोत ने इस वार्ड से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वार्ड 4 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है।

रक्षाबंधन के दौरान हेमा गहलोत द्वारा ज्ञान सारस्वत को राखी बांधने और दोनों के बीच राजनीतिक नजदीकी का संदेश सामने आने के बाद भी इस वार्ड को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। लेकिन अब ज्ञान सारस्वत के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान से यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि चुनावी मैदान से बाहर रहकर वे आगे किस तरह की राजनीतिक भूमिका निभाते हैं।

धर्मेंद्र गहलोत के इस्तीफे ने पहले ही बढ़ाई थी हलचल

अजमेर के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत के भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे ने नगर निगम चुनाव से पहले पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी की। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को वार्ड 4 से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की। इस घटनाक्रम को अजमेर उत्तर की राजनीति में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अब ज्ञान सारस्वत के चुनाव से हटने के बाद राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदल गए हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि जिन वार्डों में सारस्वत परिवार के प्रत्याशी उतरने की संभावना थी, वहां अब मुकाबले का स्वरूप अलग होगा।

भाजपा-कांग्रेस की सूची का इंतजार, बगावत का डर

अजमेर नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों की प्रत्याशियों की अधिकृत सूची को लेकर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद दोनों प्रमुख दलों ने सूची जारी करने में सावधानी बरती है। राजनीतिक जानकार इसे टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों की संभावित बगावत और दूसरे खेमे में जाने की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। ऐसे में अब राजनीतिक दलों के पास प्रत्याशियों के नाम घोषित करने और संभावित बागियों को साधने के लिए बेहद कम समय बचा है।

80 वार्ड और 4.33 लाख से अधिक मतदाता

अजमेर नगर निगम में इस बार 80 वार्डों के लिए चुनाव होना है। करीब 4.33 लाख मतदाता पार्षद चुनेंगे। महापौर पद महिला के लिए आरक्षित होने के साथ वार्डों के आरक्षण ने भी पुराने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। वार्ड आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के साथ महिला आरक्षण ने कई पुराने दावेदारों के सामने नए विकल्प तलाशने की स्थिति पैदा कर दी है।

अजमेर उत्तर में यह बदलाव और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी के राजनीतिक क्षेत्र में पूर्व भाजपा नेताओं और बागी चेहरों की सक्रियता ने चुनाव को चर्चा में ला दिया है। वार्ड 4 में हेमा गहलोत की दावेदारी के साथ-साथ अन्य वार्डों में संभावित बागियों की गतिविधियों पर भी राजनीतिक दलों की नजर है।

ज्ञान सारस्वत के फैसले से किसे फायदा?

ज्ञान सारस्वत के चुनावी मैदान से हटने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका राजनीतिक फायदा किसे मिलेगा। यदि वे स्वयं या परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ता तो कई वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय हो सकता था। अब उनके चुनाव से बाहर रहने के कारण कई जगह भाजपा-कांग्रेस तथा निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबले का समीकरण नए सिरे से बन सकता है।

हालांकि चुनाव नहीं लड़ना और राजनीतिक रूप से निष्क्रिय रहना दोनों अलग बातें हैं। ज्ञान सारस्वत की स्थानीय पकड़ और पूर्व राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए चुनाव के दौरान उनकी भूमिका पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

अब 31 अगस्त तक तस्वीर होगी साफ

फिलहाल अजमेर निकाय चुनाव में सबसे बड़ा सस्पेंस भाजपा और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सूची को लेकर है। टिकटों की घोषणा के बाद ही यह साफ होगा कि कितने दावेदार पार्टी के फैसले के साथ रहते हैं और कितने बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरते हैं।

एक तरफ धर्मेंद्र गहलोत का भाजपा से अलग होना और हेमा गहलोत का वार्ड 4 से निर्दलीय मैदान में उतरना, दूसरी तरफ ज्ञान सारस्वत का चुनाव से पूरी तरह दूरी बनाने का ऐलान—इन दोनों घटनाक्रमों ने अजमेर उत्तर की चुनावी तस्वीर को काफी बदल दिया है।

अब असली तस्वीर 31 अगस्त को नामांकन की अंतिम तारीख के बाद सामने आएगी। इसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण से कितने चेहरे संतुष्ट होते हैं, कितने बागी मैदान में उतरते हैं और ज्ञान सारस्वत चुनाव से बाहर रहकर किस राजनीतिक दिशा में अपनी भूमिका तय करते हैं।