भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के नगर निगम चुनाव में नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस प्रत्याशियों के पार्टी चिह्न जमा करने को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार देर रात तक चलता रहा।
जिला निर्वाचन कार्यालय में कुछ प्रत्याशियों के पार्टी चिह्न जमा नहीं हो पाने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए धरना शुरू कर दिया। रात करीब सवा नौ बजे कांग्रेस ने धरना समाप्त किया लेकिन नेताओं ने साफ कर दिया कि अब इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रतिनिधि निर्धारित समय से पहले ही कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए थे। कुछ चुनाव चिह्न जमा करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, जबकि कुछ प्रत्याशियों के सिंबल भरने और जमा कराने की प्रक्रिया बाकी थी।
खटीक के अनुसार, कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी पास के एक कमरे में बैठकर बचे हुए पार्टी चिह्न भरने की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे। इसी दौरान निर्धारित समय समाप्त होने पर कार्यालय का द्वार बंद कर दिया गया। इसके चलते कुछ प्रत्याशियों के चिन्ह जमा नहीं हो सके।
पार्टी चिह्न जमा नहीं हो पाने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक, जिला महामंत्री महेश सोनी, कुणाल ओझा सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिला निर्वाचन कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर विरोध दर्ज कराया।
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जब पार्टी के प्रतिनिधि निर्धारित समय से पहले कार्यालय पहुंच चुके थे और पार्टी चिह्न भरने की प्रक्रिया चल रही थी, तब बाकी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए था।
रात करीब सवा नौ बजे कांग्रेस नेताओं ने धरना समाप्त किया। धरना खत्म करते हुए खटीक ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को यहीं खत्म नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अब न्यायालय का रुख करेगी और प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगी।
नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन पार्टी चिह्न को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब चुनावी मैदान से निकलकर कानूनी लड़ाई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के आरोपों और प्रशासन के पक्ष के बीच अब अदालत में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।



