अजमेर से देवमाली के लिए निकली देवनारायण पदयात्रा, जयकारों से गूंजा मार्ग

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अजमेर।
भगवान देवनारायण के प्रति आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिला। अजमेर स्थित श्री देवनारायण भगवान के प्राचीन मंदिर ऊबड़ा का देवरा से देवमाली के लिए देवनारायण पदयात्रा रवाना हुई। पदयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान देवनारायण के जयकारे लगाए और धार्मिक ध्वजों के साथ देवमाली की ओर कदम बढ़ाए।

पदयात्रा के दौरान मार्ग में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। जगह-जगह यात्रियों का स्वागत किया गया। कई श्रद्धालु हाथों में धार्मिक ध्वज लेकर और भगवान देवनारायण के जयघोष के साथ आगे बढ़ते नजर आए। पदयात्रा का रात्रि पडाव नसीराबाद के समीवर्ती बाघसूरी गांव में रहा। गांव में पदयात्रियों की आवभगत हुई। सरकारी स्कूल के विशाल मैदान में कुछ घंटे विश्राम के बाद पदयात्री देवमाली की ओर बढ गए।

आस्था का प्रमुख केंद्र है देवमाली

देवमाली भगवान देवनारायण की आस्था से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार देवमाली में भगवान देवनारायण का प्राचीन मंदिर है और यहां उनकी आराधना की विशेष परंपरा रही है। गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी भगवान देवनारायण से गहराई से जुड़ी हुई है।

देवमाली की पहचान हाल के वर्षों में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति के कारण भी बढ़ी है। वर्ष 2024 में देवमाली को भारत के बेस्ट टूरिस्ट विलेज के रूप में भी मान्यता मिली थी।

ध्वज और जयकारों के साथ आगे बढ़े श्रद्धालु

पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान देवनारायण के जयकारे लगाते हुए यात्रा पूरी करने का संकल्प लिया। यात्रा के दौरान धार्मिक ध्वज आकर्षण का केंद्र रहे। आयोजकों और श्रद्धालुओं की ओर से यात्रा को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के प्रयास किए गए।

पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह भगवान देवनारायण में आस्था रखने वाले लोगों को एक मंच पर जोड़ने का माध्यम भी बनती है। अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु इसमें शामिल होकर देवमाली पहुंचते हैं।

देवमाली में धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति

अजमेर से शुरू हुई पदयात्रा का प्रमुख उद्देश्य देवमाली पहुंचकर भगवान देवनारायण के दर्शन और पूजा-अर्चना करना रहता है। यात्रा पूरी होने के बाद श्रद्धालु देवमाली स्थित मंदिर में दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए।

भगवान देवनारायण की आराधना राजस्थान की लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। अजमेर से देवमाली तक निकलने वाली यह पदयात्रा इसी धार्मिक परंपरा और सामूहिक श्रद्धा का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है।