नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह बदलाव करीब 12 साल बाद किया गया है।
सरकार के इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा दायरे में आ सकते हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।
15 हजार की सीमा अब 25 हजार रुपए
अब तक जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 15,000 रुपए तक था, वे निर्धारित शर्तों के तहत EPFO के अनिवार्य कवरेज के दायरे में आते थे। नई व्यवस्था में यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दी गई है। इसका मतलब है कि 15,000 से 25,000 रुपए तक वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी भी अनिवार्य PF कवरेज में शामिल हो सकेंगे।
कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा
EPFO के दायरे में आने से कर्मचारियों को भविष्य निधि के साथ संबंधित सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलता है। सरकार का यह कदम औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले उन कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की दिशा में है, जिनकी आय अब तक मौजूदा वेतन सीमा से अधिक होने के कारण अनिवार्य कवरेज से बाहर रह सकती थी। रिपोर्टों के अनुसार सरकार पर इस बदलाव से अतिरिक्त वित्तीय दायित्व भी आएगा। एक रिपोर्ट में वार्षिक सरकारी खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपए आंका गया है।
12 साल बाद बदली गई वेतन सीमा
EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा में यह बदलाव लंबे अंतराल के बाद हुआ है। इससे पहले 15,000 रुपए की सीमा लागू थी। सरकार का नया फैसला ऐसे समय आया है जब वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार के स्वरूप में बदलाव हुआ है।
कर्मचारियों की जेब पर भी पड़ेगा असर
नई सीमा के कारण जिन कर्मचारियों पर अब अनिवार्य PF योगदान लागू होगा, उनके वेतन से कर्मचारी अंशदान की कटौती हो सकती है। इससे तत्काल हाथ में मिलने वाली राशि में बदलाव संभव है, जबकि दूसरी ओर PF खाते में बचत और संबंधित सामाजिक सुरक्षा लाभ के लिए योगदान बढ़ेगा। वास्तविक प्रभाव कर्मचारी के वेतन ढांचे और लागू योगदान नियमों पर निर्भर करेगा।



