तमिलनाडु में हिंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, नवोदय स्कूलों पर राज्य को तीन महीने की मोहलत

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कोर्ट ने कहा- चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग-थलग नहीं किया जा सकता, केंद्र और राज्य बातचीत से सुलझाएं मतभेद
नई दिल्ली। तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना और वहां लागू होने वाली भाषा नीति को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी को पूरी तरह अलग रखने की स्थिति नहीं हो सकती। अदालत ने राज्य सरकार से अपने रुख पर पुनर्विचार करने और केंद्र के साथ बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने को कहा।

मामला तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नवोदय विद्यालयों के लिए जमीन चिन्हित करने से संबंधित पूर्व निर्देश पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। अदालत ने पुराने निर्देश को वापस लेने से इनकार करते हुए तमिलनाडु को सभी जिलों में जमीन चिन्हित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है।

भाषा नीति पर क्या है विवाद?

तमिलनाडु सरकार की आपत्ति मुख्य रूप से नवोदय विद्यालयों में लागू तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर है। राज्य में मौजूदा शिक्षा नीति दो भाषाओं—तमिल और अंग्रेजी-पर आधारित है। सरकार का पक्ष है कि नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था राज्य की मौजूदा नीति से अलग है और इससे भाषा नीति से जुड़े उसके अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, केंद्र की ओर से बताया गया है कि नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित आवासीय विद्यालय हैं और इनमें बहुभाषी शिक्षा व्यवस्था लागू है। इसी संदर्भ में अदालत ने कहा कि हिंदी को पूरी तरह बाहर रखने की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।

चेन्नई और दिल्ली के बीच संवाद पर जोर

सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच बातचीत जारी रखने की जरूरत बताई। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग-थलग नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत का संकेत था कि शिक्षा और भाषा जैसे मुद्दों पर टकराव के बजाय बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को नवोदय विद्यालयों के लिए जमीन चिन्हित करने के संबंध में तीन महीने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

क्या है नवोदय विद्यालय योजना?

जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार के अधीन संचालित सह-शिक्षा और आवासीय विद्यालय हैं। तमिलनाडु में इन विद्यालयों की स्थापना का मुद्दा लंबे समय से राज्य की भाषा नीति से जुड़ी आपत्तियों के कारण विवाद में रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई में विद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ हिंदी और तीन-भाषा व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय बनी।