वायुसेना को हर साल चाहिए 36 से 40 नए लड़ाकू विमान, एयर चीफ ने बताई कमी की वजह

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत के बीच वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि अगले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमान शामिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विमानों की आपूर्ति में देरी से वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या प्रभावित हुई है, लेकिन मौजूदा योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं तो स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

वायु सेना दिवस से पहले शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में एयर चीफ ने वायुसेना की मौजूदा क्षमताओं, स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम, राफेल सौदे, पांचवीं पीढ़ी के विमानों और ड्रोन युद्ध समेत कई मुद्दों पर जानकारी दी।

42 के मुकाबले लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या कम

वायुसेना की अधिकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या 42 है, जबकि वर्तमान में यह संख्या इससे काफी कम है। एयर चीफ के मुताबिक इस कमी को रोकने और भविष्य में स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाने के लिए विमानों की लगातार और पर्याप्त आपूर्ति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जिन विमानों की समय पर आपूर्ति की उम्मीद थी, उनमें देरी हुई है। उनका कहना था कि नए विमान मिलने की गति बढ़ाने के साथ-साथ मौजूदा लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना महत्वपूर्ण है।

AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्पों पर विचार

स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को वायुसेना की भविष्य की अहम जरूरतों में शामिल करते हुए एयर चीफ ने कहा कि यदि इसमें देरी होती है तो दूसरे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि रूस ने भारत को अपने Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है, लेकिन इस विमान को खरीदने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। एयर चीफ ने स्पष्ट किया कि AMCA में देरी की स्थिति में वैकल्पिक प्लेटफॉर्म पर विचार की संभावना है।

114 राफेल पर बातचीत, वित्त वर्ष में सौदा होने की उम्मीद

वायुसेना प्रमुख ने फ्रांस से प्रस्तावित 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) सौदे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कीमत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत चल रही है और यदि प्रक्रिया योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो मौजूदा वित्त वर्ष में सौदे को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

यह प्रस्ताव भारत और फ्रांस के बीच सरकार-से-सरकार प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। 114 विमानों की यह खरीद वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने की योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वदेशी इंजन पर जोर

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने लड़ाकू विमानों के लिए इंजन के मामले में विदेशी निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को कम से कम एक स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन विकसित करने की दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को परिचालन क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि देश में विमान और उनके महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण बढ़ाना जरूरी है।

चीन-पाकिस्तान के पांचवीं पीढ़ी के विमान पर चिंता

पाकिस्तान को चीन की ओर से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उपलब्ध कराए जाने की खबरों पर भी एयर चीफ ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान को ऐसे विमान मिलते हैं और उनके पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी लड़ाकू विमान की क्षमता केवल उसके प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसे अन्य सैन्य प्रणालियों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, यह भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पास मौजूदा परिस्थितियों से निपटने की क्षमता है।

अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं

दुनिया भर के संघर्षों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एयर चीफ ने भारतीय वायुसेना के लिए अलग ड्रोन फोर्स बनाने की आवश्यकता से इनकार किया। उनका कहना है कि ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढांचे और अन्य हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उन्होंने वायुसेना के आधुनिकीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका बढ़ाने की भी बात कही। उनके अनुसार भविष्य की वायुसेना को AI-augmented force के रूप में विकसित करना होगा।

अधिकारियों और वायुसैनिकों की कमी भी स्वीकार की

एयर चीफ ने वायुसेना में अधिकारियों और वायुसैनिकों की कुछ कमी होने की बात भी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि भर्ती और प्रशिक्षण के जरिए इस कमी को दूर करने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कमियों के बावजूद वायुसेना की क्षमताएं बरकरार हैं और विभिन्न आधुनिकीकरण एवं खरीद कार्यक्रमों के समय पर आगे बढ़ने से आने वाले वर्षों में स्थिति बेहतर हो सकती है।

वायु सेना दिवस 8 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इससे पहले एयर चीफ की वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई प्राथमिकताओं में लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना, स्वदेशी तकनीक को मजबूत करना, AI का इस्तेमाल बढ़ाना और भविष्य की पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता विकसित करना प्रमुख रहे।