राजस्थान में वरिष्ठ IAS शिखर अग्रवाल APO, 40 विला-कॉटेज की खरीद का मामला चर्चा में

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को पदस्थापन की आगामी आदेशों की प्रतीक्षा (APO) में रख दिया है। कार्मिक विभाग ने बुधवार देर रात इस संबंध में आदेश जारी किए। सरकार ने आदेश में प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है। यह घटनाक्रम अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़ी 40 विला-कॉटेज की खरीद के मामले को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया है।

उदयपुर और अलवर में खरीदी गईं 40 संपत्तियां

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने उदयपुर जिले के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज तथा अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे थे। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपए बताई गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, उदयपुर में कॉटेज की रजिस्ट्री सितंबर 2023 में और अलवर में विला की रजिस्ट्री मार्च 2026 में हुई थी। इन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदे जाने और बाद में उसी कंपनी को लीज पर दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

सालाना 1.80 करोड़ रुपए की लीज राशि का दावा

संपत्ति सौदों को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार उदयपुर के प्रत्येक कॉटेज के लिए सालाना चार लाख रुपए और अलवर के प्रत्येक विला के लिए पांच लाख रुपए की लीज राशि निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। इस हिसाब से सभी 40 संपत्तियों से सालाना करीब 1.80 करोड़ रुपए की लीज आय होने का दावा किया गया है।

इन लेनदेन के बाद संपत्तियों की खरीद, लीज समझौतों और अधिकारियों की अचल संपत्ति विवरणी में दर्ज जानकारियों को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन सवालों के संबंध में संबंधित दस्तावेजों और सभी पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी

APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल राज्य सरकार में उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), राजकीय उपक्रम और निवेश संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन और राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) सहित अन्य संस्थाओं से जुड़े दायित्व भी थे।

कार्मिक विभाग के आदेश में उन्हें प्रशासनिक कारणों से आगामी पदस्थापन आदेशों तक APO रखने की बात कही गई है। आदेश में संपत्ति खरीद के विवाद को कार्रवाई का आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।

अब आगे क्या होगा?

इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल अग्रवाल की अगली नियुक्ति और संपत्ति से जुड़े सवालों पर किसी औपचारिक जांच के संबंध में सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।