संगरूर की इंसाफ रैली में अमरीका के साथ व्यापार समझौते को लेकर केंद्र पर निशाना
ट्रंप के दबाव में फैसला लेने, किसानों और छोटे उद्योगों के हितों से समझौते का लगाया आरोप
संगरूर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने बहस की चुनौती देते हुए कहा कि वह महज पांच मिनट में साबित कर देंगे कि प्रधानमंत्री ‘देशद्रोही’ हैं और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नियंत्रण में काम कर रहे हैं। पंजाब के संगरूर में बुधवार को कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो बहस के लिए अपनी पसंद का कोई भी निर्णायक नियुक्त कर सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और उद्योगपति गौतम अडानी का नाम भी संभावित निर्णायक के रूप में लिया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी थी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री संसद में चर्चा की बात करते हैं, लेकिन विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता और उनका माइक बंद कर दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री सीधे आमने-सामने बैठकर बहस करने से बच रहे हैं।
अमरीका के साथ व्यापार समझौते पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने भारत-अमरीका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव और धमकी के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते पर सहमति दी। राहुल ने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण समझौते से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल और संबंधित अधिकारियों से पर्याप्त विचार-विमर्श क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से भारतीय किसानों, छोटे एवं मझोले उद्योगों और कारोबारियों के हित प्रभावित होंगे। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों पर भी देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिनमें ट्रंप भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय लेते रहे हैं।
अडानी मामले को भी व्यापार समझौते से जोड़ा
कांग्रेस नेता ने अमरीका में उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी पक्ष ने अडानी की कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में राहत दी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री पर लगाए जा रहे अपने आरोपों से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि इस पूरे घटनाक्रम में देश के हितों को किस तरह प्राथमिकता दी गई।
राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और छोटे कारोबारियों की बजाय बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के बुनियादी ढांचे और आर्थिक संसाधनों पर कुछ बड़े औद्योगिक घरानों का प्रभाव बढ़ रहा है। पंजाब के औद्योगिक विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में ऑटोमोबाइल और लघु-मझोले उद्योगों ने पहले रोजगार के अवसर पैदा किए थे। किसानों और छोटे उद्योगों को मजबूत किए बिना पंजाब की अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिल सकती।
अमित शाह के नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य पर सवाल
रैली में राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन साल में पंजाब को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी मात्रा में हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ पकड़े जा रहे हैं, तो इनके स्रोत और नेटवर्क के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से पंजाब के युवाओं और परिवारों को गंभीर नुकसान हो रहा है। राज्य को ऐसी सरकार की जरूरत है जो नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करे और युवाओं के लिए रोजगार तथा बेहतर अवसर उपलब्ध कराए।
भगवंत मान सरकार पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के फैसलों पर दिल्ली में बैठे नेताओं और केंद्र के गृह मंत्री का प्रभाव है। उनके अनुसार, राज्य का शासन पंजाब के लोगों की जरूरतों के मुताबिक चलना चाहिए, न कि दिल्ली से नियंत्रित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब का मुख्यमंत्री वास्तव में राज्य के हितों के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने वाला होना चाहिए। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर पंजाब का प्रशासन और निर्णय प्रक्रिया राज्य के भीतर से संचालित होगी।
पंजाब के चुनावी माहौल में कांग्रेस की रैली
संगरूर की यह रैली ऐसे समय हुई है, जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज हो रही हैं। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में किसानों, छोटे उद्योगों, बेरोजगारी और नशे को प्रमुख मुद्दे बनाते हुए कांग्रेस के पक्ष में समर्थन मांगा। रैली में उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार, दोनों पर निशाना साधा।



