कुदरती तीरंदाजों को अदद गुरु द्रोणाचार्य की जरूरत

आबूरोड/सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड तहसील के आदिविासी बहुल क्षेत्र के पहाड़ी कुदरती तीरंदाजों को अदद गुरु द्रोणाचार्य की जरूरत है जो उनकी कला को निखार सके।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जनप्रतिनिधियों के सामने स्थानीय युवा तीरंदाजों ने स्थानीय स्तर पर एकेडमी खोलने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।

पहाड़ी क्षेत्र के निचलागढ़ गांव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर क्षेत्र के युवाओं ने धनुष बाण दिखाते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को तीरंदाजी एकेडमी क्षेत्र में खोलने की मांग उठाई।

आदिवासी क्षेत्रों में छिपी है प्रतिभा

इलाके के हर घर में धनुष बाण अनिवार्यता होते हैं, निशाना साधने की हुनर भी यहां के नौनिहाल बाल्यकाल से ही जान लेते हैं। लेकिन खुद ही कुदरती नवाजे के तौर के बाद उचित मंच की सुविधा न मिल पाने से प्रतिभा क्षेत्र से ऊपर नहीं उठ पाई है। प्रशिक्षण मिल जाए तो लिंबा राम जैसे कई तीरंदाज अचूक निशाना साधकर बड़े स्तर का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

युवाओं ने जनप्रतिनिधियों को घेरा

गत सोमवार को निचलागढ विश्व आदिवासी दिवस के खुला मंच में स्थानीय युवा धनुष बाण के साथ मंच की तरफ आगे बढ़े और पाबा सरपंच सोमाराम, उपलाखेजड़ा सरपंच कोदरीबाई, निचलागढ़ सरपंच रेखा कुमारी, उपला गढ़ सरपंच भवना राम व अन्य जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में तीरंदाज अकादमी खोलने के लिए ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक आवाज बुलंद करने के लिए अड़े।