भारत विकास परिषद राजस्थान मध्य प्रांत की पर्यावरण कार्यशाला ‘पुनर्नवा’ 28 जून को

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राजस्थान में पर्यावरण का महाअभियान
अजमेर। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा जल संकट, प्लास्टिक प्रदूषण एवं घटते हरित क्षेत्र जैसी गंभीर चुनौतियों के प्रभावी समाधान के उद्देश्य से भारत विकास परिषद, राजस्थान मध्य प्रांत द्वारा एक व्यापक पर्यावरण कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2026-27 में प्रदेशभर में 1 लाख 25 हजार वृक्षारोपण, 1 लाख 75 हजार सीड बॉल (बीज बम) वितरण, 250 वाटर बॉडी (जलस्रोतों) का संरक्षण, तथा 75 हजार कपड़े के थैलों का वितरण किया जाएगा।

इसी महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए भारत विकास परिषद राजस्थान मध्य प्रांत की प्रांतीय पर्यावरण प्रकल्प कार्यशाला का आयोजन रविवार 28 जून को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्वामी विवेकानंद सभागार, गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गुलाबपुरा में किया जा रहा है।

भारत विकास परिषद राजस्थान मध्य प्रांत के पर्यावरण संयोजक राजेश कामदार के अनुसार पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस विशेष की गतिविधि न मानकर वर्षभर चलने वाला सामाजिक अभियान बनाया जाएगा। परिषद द्वारा तैयार पर्यावरण कार्ययोजना के अनुसार प्रदेश की शाखाओं के माध्यम से प्रत्येक जिले में पर्यावरण संरक्षण के ठोस एवं मापनीय कार्य किए जाएंगे। अभियान के तहत वृक्षारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन, प्लास्टिक उन्मूलन, कचरा प्रबंधन तथा जनजागरूकता पर विशेष बल दिया जाएगा।

प्रांतीय पर्यावरण सदस्य दिनेश छतवानी के अनुसार कार्यशाला में क्षेत्रीय पर्यावरण संयोजक दिलीप पारीक विशेष रूप से पर्यावरण गतिविधियों की कार्ययोजना, लक्ष्य निर्धारण, क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग की विस्तृत जानकारी देंगे। वे शाखा स्तर से लेकर जिला एवं प्रांतीय स्तर तक पर्यावरण गतिविधियों के प्रभावी संचालन का रोडमैप प्रस्तुत करेंगे। उनके साथ पर्यावरणविद् राजेंद्र तिवारी भी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

प्रत्येक जिले में विकसित होगा सघन वन

परिषद की योजना के अनुसार राजस्थान के प्रत्येक जिले में कम से कम एक सघन वन (Miyawaki Forest) विकसित किया जाएगा। जापानी वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस तकनीक में कम क्षेत्र में अधिक घनत्व के साथ स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं, जिससे कुछ ही वर्षों में घना और आत्मनिर्भर वन तैयार हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और प्रदूषण को कम करने में मियावाकी वन अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं।

1.75 लाख सीड बॉल से बढ़ेगी हरियाली

प्रदेशभर में 1 लाख 75 हजार सीड बॉल तैयार कर उनका वितरण और विसर्जन किया जाएगा। इन सीड बॉल्स में स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाएगा, जिन्हें वर्षा ऋतु के दौरान खाली भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों और अनुपयोगी स्थानों पर फैलाया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह कम लागत और व्यापक जनभागीदारी वाला वृक्ष संवर्धन का प्रभावी माध्यम है।

250 जलस्रोतों को मिलेगा नया जीवन

जल संकट से जूझ रहे राजस्थान में परिषद ने 250 वाटर बॉडी संरक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत तालाब, बावड़ी, जोहड़, नाड़ी, कुण्ड और अन्य स्थानीय जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर कार्य किया जाएगा। यदि परंपरागत जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जाए तो भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

75 हजार कपड़े के थैले बनेंगे प्लास्टिक के विकल्प

प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए परिषद द्वारा प्रदेशभर में 75 हजार कपड़े के थैलों का वितरण किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को एकल उपयोग प्लास्टिक से दूर कर पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है। कार्यकर्ताओं द्वारा बाजारों, विद्यालयों, सामाजिक कार्यक्रमों एवं जनजागरण अभियानों के माध्यम से कपड़े के थैले वितरित किए जाएंगे।

शाखा स्तर पर होंगे विशेष अभियान

पर्यावरण कार्ययोजना के अनुसार प्रत्येक शाखा द्वारा जागरूकता रैली तथा संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। ईको क्लबों के माध्यम से छात्रों को वृक्षारोपण, स्वच्छता, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, पक्षी संरक्षण तथा जैव विविधता संरक्षण की गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

कार्यशाला में प्रदेशभर से जुटेंगे प्रतिनिधि

आयोजक शाखा के अध्यक्ष संपत कुमार व्यास ने बताया कि प्रांतीय अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी, प्रांतीय महासचिव आनंद सिंह राठौड़ तथा प्रांतीय वित्त सचिव अमित सोनी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से परिषद पदाधिकारी, शाखाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, पर्यावरण संयोजक एवं पर्यावरण सदस्य भाग लेंगे। आयोजकों ने इसे केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि हरित राजस्थान-सुरक्षित भविष्य के संकल्प अभियान का प्रारंभिक चरण बताया है।

परिषद का मानना है कि सरकारों के प्रयास तभी सफल होंगे जब समाज स्वयं पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी माने। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली, ऊर्जा बचत और स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।