नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के समय नकदी मिलने से संबंधित मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को सही बताया है।
सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता में न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 के अंतर्गत गठित जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। समिति के दो अन्य सदस्य बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीचंद्रशेखर और कर्नाटक उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य हैं। दो खंडों की यह रिपोर्ट दोनों सदनों में क्रमश: लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों ने पेश की।
यह जांच रिपोर्ट 14 मार्च 2025 की रात न्यायमूर्ति वर्मा के तुगलक क्रिसेन्ट, दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने की घटना के दौरान 500 रुपए के जले हुए, अधजले और गीले नोटों की गड्डी मिलने से संबंधित है। जांच समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिली जिसके स्रोत का वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। समिति ने पाया कि उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की और जांच के दौरान सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए।
इस घटना की जांच शुरू होने के बाद उन्हें अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। न्यायाधीश को पद से हटाए जाने के लिए 200 से अधिक सांसदों ने पिछले वर्ष मानसून सत्र में लोकसभा अध्यक्ष को प्रस्ताव दिया था। इसके बाद अध्यक्ष ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
न्यायमूर्ति वर्मा ने सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जिस स्टोर रूम में आग लगी उसका इस्तेमाल फर्नीचर, बोतलें, क्रॉकरी आदि जैसी अनुपयोगी वस्तुओं के लिए किया जा रहा था और यह मुख्य आवास से जुड़ा हुआ नहीं था। उन्होंने कहा था कि वह और उनकी पत्नी घटना के समय आवास पर मौजूद नहीं थे और आग बुझने के पश्चात् उनके परिवार या स्टॉफ के किसी सदस्य द्वारा कोई नकदी अथवा करेंसी नोट नहीं देखे गए थे।
उन्होंने कहा कि उनके द्वारा या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वहां कोई नकदी नहीं रखी गई थी। उन्होंने कहा था कि उनको दिखाई गई सामग्री से षडयंत्र की आशंका उत्पन्न होती है। बाद में इस विवाद के तूल पकड़ने पर न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।



