जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष कांग्रेस पर तीखा हमला एवं तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेसी नेता अपनी सरकार में होटलों में आराम करते थे और सिर्फ अपनी सरकार बचाने के लिए दिल्ली जाते थे, जबकि मैं जनहित कार्यों के लिए जाता हूं।
शर्मा गुरुवार को राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में किस्सा कुर्सी का इतना लम्बा चला कि राजनीतिक मजबूरी से दो हिस्सों में बंटी सरकार को सुरक्षा के लिए पुलिस के संगीन पहरों की आवश्यकता पड़ी। जिस पुलिस तंत्र का कर्तव्य कानून व्यवस्था बनाना था, उन्हें मजबूरन सत्ता पक्ष के बागी विधायकों को नियंत्रित करने का काम सौंपा गया।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बिना नाम लिए कहा कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता अपने आप को महात्मा गांधी का अनुयायी बताते हैं। वह महात्मा गांधी की आत्मकथा- सत्य के साथ प्रयोग दोबारा पढ़ें और सोचें कि उनकी सरकार में प्रदेश के युवाओं पर क्या बीती है।
उन्होंने कहा कि ईआरसीपी योजना को पिछली कांग्रेस सरकार ने लटकाने, भटकाने और अटकाने का काम किया, लेकिन हमारी सरकार ने इस परियोजना के 26 हजार करोड़ रुपए के कार्य धरातल पर शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस सरकार ने जल जीवन मिशन को अपने कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया। अब इसके आठ दोषियों के साथ इनके मंत्री तक जेल में बंद रहे और अभी तो पिक्चर बाकी है।
शर्मा ने वीबी-जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष के साथियों को ‘राम’ शब्द पर भी एतराज है। इन लोगों ने भगवान श्रीराम को काल्पनिक मानते हुए उच्चत्तम न्यायालय में शपथ पत्र तक दे दिया था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी भगवान श्रीराम की उपासना करते थे और देश में रामराज्य लाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि राम के नाम से तो सिर्फ कालनेमी घबराते हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि श्रीराम जी का नाम लेते रहिए, जीवन अच्छे से पार होगा, श्रीराम जी दयालु हैं, सबका भला करते हैं, आपका भी भला करेंगे।
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार के दो वर्ष बनाम पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल पर सार्वजनिक बहस करने की कांग्रेस की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर यह बहस सदन में हो तो उचित होगा। साथ ही उन्होंने सरकार की विकास यात्रा का एक दस्तावेज सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कांग्रेस के पांच साल पर भाजपा सरकार के दो साल को भारी बताते हुए कहा कि जो हर बात पर फड़फड़ाते बहुत है, सफर में वही लड़खड़ाते बहुत हैं, हवा में हमने जिन पंरिदों को देखा, वे उड़ते हैं कम, फड़फड़ाते बहुत हैं।
शर्मा ने कांग्रेस के दौरान युवाओं के साथ किए गए धोखे और वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा युवाओं को दिए जा रहे असीमित मौके पर कविता पढ़ी- आज मैं किसी व्यक्ति की बात नहीं कर रहा, मैं एक प्रवृत्ति की बात कर रहा हूं… उस प्रवृत्ति की, जो कुर्सी पर बैठते ही बदल जाती है और कुर्सी जाते ही ज्ञान का ग्रंथ बन जाती है। हम राजस्थान वाले सीधे लोग हैं। यहां कहा जाता है- जब तक ऊंट खड़ा रहता है, तब तक आदमी को रेत नहीं दिखती। एक समय था, जब कुछ लोग सत्ता में थे। पूरा कुनबा साथ था एक हाथ में हुक्म, दूसरे में रिश्तेदारी। तब सिस्टम बड़ा समझदार था। इम्तिहान होते थे, पर मेहनत से पहले पहचान देखी जाती थी।
इम्तिहान होते थे, पर सवाल कागज में नहीं, पहले जेब में उतरते थे। और जो गरीब, जो मेहनती युवा, वो लाइन में ही खड़ा रह जाता। उस वक्त युवाओं की याद नहीं आई। उस वक्त नैतिकता की किताब नहीं खुली। उस वक्त अधिकारों का भाषण नहीं हुआ। क्यों उस वक्त नैतिकता कहां थी। उस वक्त युवाओं के अधिकार कहां थे। उस वक्त ईमानदारी किस फाइल में बंद थी लेकिन, समय बड़ा बलवान है। एक दिन कुर्सी खिसकी।
ऊंट बैठ गया और तभी- एक चमत्कार हुआ। अब वही लोग, जो कल तक घी पीने में मस्त थे आज मंच से बोल रहे हैं- भ्रष्टाचार पाप है। युवा देश का भविष्य है। नैतिकता सबसे ऊपर है। अरे वाह! पहले घी पीया, अब उपदेश दिया। जब सत्ता हाथ में थी, तब मुंह में माखन था। अब बाहर आए, तो ज्ञान की मटकी फोड़ दी।
उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं- जब कुर्सी थी, तब जुबान कहां थी। जब फैसले करने का वक्त था, तब विवेक छुट्टी पर क्यों था और सबसे मज़ेदार बात ये है- अब हर मंच से ईमानदारी का पाठ पढ़ाया जा रहा है। अरे भई, ईमानदारी कोई रिटायरमेंट के बाद की योजना नहीं होती।
ईमानदारी वो चीज है जो कुर्सी पर बैठकर दिखाई जाती है, न कि कुर्सी से उतरकर सुनाई जाती है। साहब, युवाओं को भाषण नहीं चाहिए, युवाओं को बराबरी का मौका चाहिए। उन्हें नैतिकता की कहानी नहीं, निष्पक्ष परीक्षा चाहिए। हमने उम्मीदों को फिर से पंख दिए हैं, आज मेहनती युवाओं का सपना साकार हो रहा है।



