संतोष खाचरियावास।
अजमेर। पिछले 4 साल से मोटा मुनाफा कमा रही तेल कम्पनियों को युद्ध के कारण अब घाटा हो रहा है। चतुर कम्पनियों ने अपने मुनाफे में से तो कभी आमजन को राहत नहीं दी, लेकिन अब अपना घाटा आम जनता के सिर मढ़ दिया है। पेट्रोल डीजल के दामों में 9 दिन में तीसरी बार बढ़ोतरी हो चुकी है। दाम बढ़ने का यह सिलसिला चल पड़ा है, थमेगा कब, नहीं पता। पता है तो सिर्फ इतना कि लोगों की दोतरफा जेब कट रही है। एक तो पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ रहे हैं, दूसरे पेट्रोल पंपों पर नोजल में गड़बड़ी कर तेल कम दिया जा रहा है। हाल ही में राजस्थान भर में पेट्रोल पंपों की जांच हुई तो चौंकाने वाली बात सामने आई।
कई पेट्रोल पंप संचालकों ने नोजल के माप में गड़बड़ी कर रखी है, यानी ग्राहकों से पूरे दाम लेने के बावजूद पेट्रोल डीजल कम दिया जा रहा है। बरसों से ऐसा ही हो रहा है। माप तोल विभाग की टीम इस लूट में हिस्सा बंटाकर इतनी मालामाल हो रही है। डिस्पेंसर यूनिट (डीयू) के केलिब्रेशन में क्या खेल चल रहा है, …अचानक पेट्रोल पंपों की जांच क्यों हो रही है…इन सबका सब सवालों के पीछे कड़वे जवाब छिपे हैं। फिलहाल नीचे ये आंकड़े जान लीजिए कि राजस्थान में किस जिले के कितने पेट्रोल पंपों पर कितने नोजलों में गड़बड़ी मिली है।
जिला कितने पेट्रोल पंप पर कार्रवाई सीज किए गए नोजल की संख्या
जयपुर (Jaipur) 3 पेट्रोल पंप 12 नोजल
नागौर (Nagaur) 4 पेट्रोल पंप 11 नोजल
बाड़मेर (Barmer) 6 पेट्रोल पंप 10 नोजल
सिरोही (Sirohi) 7 पेट्रोल पंप 9 नोजल
दौसा (Dausa) 2 पेट्रोल पंप 7 नोजल
भरतपुर (Bharatpur)4 पेट्रोल पंप 6 नोजल
अलवर (Alwar) 2 पेट्रोल पंप 5 नोजल
जोधपुर (Jodhpur) 4 पेट्रोल पंप 5 नोजल
पाली (Pali) 4 पेट्रोल पंप 5 नोजल
सीकर (Sikar) 1 पेट्रोल पंप 4 नोजल
अजमेर (Ajmer) 3 पेट्रोल पंप 4 नोजल
भीलवाड़ा (Bhilwara)3 पेट्रोल पंप 4 नोजल
जैसलमेर (Jaisalmer)4 पेट्रोल पंप 4 नोजल
बीकानेर (Bikaner) 1 पेट्रोल पंप 3 नोजल
कोटा (Kota) 2 पेट्रोल पंप 3 नोजल
उदयपुर (Udaipur) 2 पेट्रोल पंप 3 नोजल
डूंगरपुर (Dungarpur)3 पेट्रोल पंप 3 नोजल
झालावाड़ (Jhalawar)2 पेट्रोल पंप 2 नोजल
झुंझुनू (Jhunjhunu) 2 पेट्रोल पंप 2 नोजल
सवाई माधोपुर (S. Madhopur) 1 पेट्रोल पंप
रि-केलिब्रेशन कराओ, छुट्टी पाओ
ताज्जुब की बात है कि यह आंकड़े महज वाहवाही लूटने के लिए हैं। नोजल में गड़बड़ी मिलने के बावजूद कोई पंप सीज नहीं किया गया। एलएमओ की टीम केवल दुबारा केलिब्रेशन कराने का नोटिस देकर चली जाती है। दरअसल केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और तेल कम्पनियों, इन तीनों के नियमों में विरोधाभास होने से उपभोक्ताओं पर मार पड़ रही है और इसी आड़ में से लूट का दौर जारी है।
5 लीटर पर 15 एमएल तेल की ऊपरी कमाई नहीं अपराध
एल लीटर पर 3 एमएल और पांच लीटर पर 15 एमएल तक कम तेल बेचने को पेट्रोलियम कम्पनियां पंप संचालक का अपराध नहीं बल्कि मशीन का फॉल्ट मानती हैं और दुबारा केलिब्रेशन कराकर इसका ‘प्रायश्चित’ कर लेने की सुविधा दे रखी है। इधर ग्राहकों को बूंद बूंद की चपत लगती है तो उधर इसी सुविधा का लाभ उठाकर पंप संचालक दिनभर बूंद बूंद से घड़ा भर रहे हैं। एक ग्राहक के 3 एमएल से कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन पंप संचालक दिनभर में हजारों लीटर तेल बेचकर ग्राहकों को सैकड़ों लीटर तेल की चपत लगा रहे हैं। पकड़े जाने पर भी चोरी नहीं कहलाती।
केलिब्रेशन में हो रहा खेल
केन्द्र सरकार ने साल में एक बार (अब 2 साल) पेट्रोल पंप के नोजलों का केलिब्रेशन कराने का नियम बना रखा है। तेल कम्पनियां अपनी तरफ से एक बार केलिब्रेशन की फीस वहन करती हैं। रि केलिब्रेशन की नौबत आने पर डीलर को फीस का वहन करना पड़ता है। हर छह माह में तेल कम्पनी के सेल्स ऑफिसर निरीक्षण करते हैं। प्रति दो माह में डीयू मशीन कम्पनी का टेक्नीशियन मेंटीनेंस करने आता है। इनकी ‘ओके’ रिपोर्ट मिलती है। इसके बाद अगली विजिट तक डीयू मशीन से प्रति पांच लीटर पर 15 एमएल पेट्रोल डीजल कम भी निकले तो कोई गड़बड़ नहीं, गलती नहीं, बेईमानी नहीं…सिर्फ मशीन का फॉल्ट माना जाता है।
