एमडीएसयू में सांस्कृतिक प्रतियोगिता : संगीत के सुरों में राष्ट्रवाद की गूंज

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अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर महाविद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिता-2026 के अवसर पर देव नारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओम प्रकाश बढ़ाना ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और युवा भूमिका पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा हमें अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान, गौरव और कृतज्ञता का संस्कार देती है। भगवान श्रीराम को किसी एक धर्म तक सीमित करने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम किसी संप्रदाय या पूजा-पद्धति के नहीं, बल्कि भारत की जीवन-पद्धति के प्रतीक हैं। राम भारत की पहचान, आदर्श और राष्ट्रीय चेतना का आधार हैं, इसलिए जय श्री राम केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय अभिव्यक्ति है।

उन्होंने स्वयं को इस विश्वविद्यालय का पूर्व विद्यार्थी बताते हुए कहा कि यह परिसर उनके लिए केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि संस्कारों की भूमि है। उन्होंने कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस मंच पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। उन्होंने सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों और प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं तथा इस प्रतियोगिता को भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बताया।

उन्होंने बताया कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संस्कार और राष्ट्रबोध का साधन है। आज के वैश्विक प्रभावों के दौर में भारतीय कला और संस्कृति राष्ट्र की आत्मा की रक्षा कर रही हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना 145 करोड़ नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी के पाँच सूत्र.अपनी भाषा, भोजन, भजन, भूषा और भ्रमण—को अपनाने का आह्वान किया।

नारी सशक्तीकरण पर बोलते हुए उन्होंने बेटियों को लेकर समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच पर चिंता जताई और कहा कि वास्तविक परिवर्तन समाज की मानसिकता बदलने से ही आएगा।

आज हुई प्रतियोगिताओं के संबंध मे जानकारी देते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने बताया कि कार्यक्रम को दो प्रमुख श्रेणियों में आयोजित किया गया. साहित्यिक प्रतियोगिताएं तथा संगीत प्रतियोगिताएं।

साहित्यिक प्रतियोगिताएं

साहित्यिक वर्ग में प्रश्नोत्तरी, वाद–विवाद एवं आशु भाषण जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रश्नोत्तरी (क्विज) में कुल 8 महाविद्यालयों की टीमों ने भाग लिया, जिनमें प्रत्येक टीम में 3 विद्यार्थी सम्मिलित थे।

अंग्रेजी वाद–विवाद प्रतियोगिता में भी 8 महाविद्यालयों ने भाग लिया। प्रत्येक टीम में दो प्रतिभागी रहे.एक पक्ष में तथा एक विपक्ष में। इस प्रतियोगिता का विषय था.
“In the opinion of this House, Industrialization is the root cause of Environmental Destruction.”

अंग्रेजी आशु भाषण (Elocution) प्रतियोगिता में 8 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इसका विषय था— “Role of Women in Indian Agriculture.”

हिंदी वाद–विवाद प्रतियोगिता में 8 महाविद्यालयों से 8 प्रतिभागियों ने पक्ष में तथा 8 ने विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए। इसका विषय था—इस सदन की राय में मानवता के लिए आर्थिक विस्तारवाद राजनीतिक विस्तारवाद से अधिक घातक है।

हिंदी आशु भाषण (वाग्मिता) प्रतियोगिता में 8 महाविद्यालयों के एक-एक विद्यार्थी ने भाग लिया। विषय था—वंदे भारत – स्वतंत्रता संग्राम का जयघोष।

संगीत प्रतियोगिताएं

संगीत श्रेणी के अंतर्गत कुल नौ विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें शास्त्रीय, लोक, भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत की विविध विधाओं में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। शास्त्रीय गायन (हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक) में 8 महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। शास्त्रीय वाद्य एकल (ताल वाद्य) तथा शास्त्रीय वाद्य एकल (अताल वाद्य) में तीन-तीन महाविद्यालयों/विद्यार्थियों ने सहभागिता की। लाइट वोकल–इंडियन में 7 महाविद्यालयों, जबकि वेस्टर्न वोकल –एकल में 5 महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दी।

समूह गान–इंडियन में 5 महाविद्यालयों तथा समूह गान–वेस्टर्न में 4 महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। लोक वाद्य वृंद (Folk Orchestra) में 8 महाविद्यालयों की टीमें सम्मिलित हुईं। वेस्टर्न वाद्य–एकल प्रतियोगिता में 4 विद्यार्थियों ने सहभागिता की।