नई दिल्ली। कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुने जाने के साथ ही उनके पांच दशक से अधिक लंबे शानदार सिनेमाई सफर की एक बार फिर चर्चा हो रही है। रंगमंच से अभिनय की शुरुआत करने वाले अनंत नाग ने कन्नड़ फिल्मों के साथ-साथ हिंदी और कई अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों, समानांतर सिनेमा तथा टेलीविजन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
चार सितंबर 1948 को कर्नाटक के शिराली में जन्मे अनंत नागरकट्टे ने आगे चलकर फिल्म जगत में अनंत नाग के नाम से पहचान बनाई। उनका फिल्मी करियर 1970 के दशक में शुरू हुआ और इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में काम किया। उपलब्ध फिल्म रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं।
रंगमंच से फिल्मों तक पहुंचे
फिल्मों में आने से पहले अनंत नाग का जुड़ाव रंगमंच से रहा। मुंबई में उन्होंने थिएटर गतिविधियों में हिस्सा लिया और करीब आठ वर्षों तक रंगमंच से जुड़े रहे। इसी दौरान अभिनय की बारीकियों को समझने और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का अनुभव उन्हें मिला।
कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद श्याम बेनेगल की ‘अंकुर’ ने उन्हें समानांतर सिनेमा में पहचान दिलाई। ‘निशांत’, ‘मंथन’ और ‘भूमिका’ जैसी फिल्मों ने उनके शुरुआती दौर के अभिनय को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया।
कन्नड़ सिनेमा में बनाया मजबूत मुकाम
अनंत नाग की सबसे बड़ी पहचान कन्नड़ सिनेमा से बनी। उन्होंने रोमांटिक, सामाजिक, गंभीर और हास्य प्रधान फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। ‘बयलु दारी’, ‘कन्नेश्वरा रामा’, ‘ना निन्ना बिडलारे’, ‘चंदनदा गोम्बे’, ‘बेन्किया बाले’, ‘गणेशना माडुवे’ और ‘गौरी गणेशा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया।
बाद के वर्षों में भी उन्होंने खुद को नई पीढ़ी के सिनेमा से जोड़े रखा। ‘मुंगारू मले’, ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’, ‘राजकुमार’, ‘सरकारी हाय. प्रा. शाले, कसारगोडु, कोडुगे: रामन्ना राय’, ‘केजीएफ: चैप्टर 1’ और ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी देखने को मिली।
हिंदी समेत कई भाषाओं में किया अभिनय
कन्नड़ के अलावा अनंत नाग ने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी और मलयालम फिल्मों में भी काम किया। समानांतर सिनेमा के दौर में श्याम बेनेगल जैसे फिल्मकारों के साथ काम करने से उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनका अभिनय केवल किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित नहीं रहा और उन्होंने व्यावसायिक फिल्मों से लेकर गंभीर विषयों वाली फिल्मों तक में काम किया।
टेलीविजन और ‘मालगुडी डेज’ से भी जुड़ाव
अनंत नाग ने फिल्मों के साथ टेलीविजन पर भी अपनी छाप छोड़ी। उनके भाई शंकर नाग द्वारा निर्देशित चर्चित धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ में भी अनंत नाग नजर आए। आर.के. नारायण की कहानियों पर आधारित इस धारावाहिक ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में खास स्थान बनाया।
अभिनय की सहज शैली बनी पहचान
अनंत नाग की अभिनय शैली को उनकी सहजता और स्वाभाविक अभिव्यक्ति के लिए पहचाना जाता है। उन्होंने बड़े पर्दे पर नायक की भूमिकाओं से लेकर चरित्र भूमिकाओं तक कई तरह के किरदार निभाए। पांच दशक से अधिक समय तक लगातार सक्रिय रहना उनके करियर की खास विशेषता रही है।
भारत सरकार ने भी उनके लंबे योगदान को सम्मानित किया है। वर्ष 2025 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। सरकारी पद्म पुरस्कार प्रोफाइल में भी उन्हें पांच दशकों से अधिक समय से भारतीय सिनेमा में योगदान देने वाला बहुमुखी कन्नड़ अभिनेता बताया गया है।
अब दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मान
अनंत नाग के लंबे सिनेमाई योगदान को देखते हुए उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 के लिए चुना गया है। यह भारतीय सिनेमा में आजीवन और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला प्रमुख राष्ट्रीय सम्मान है।
उन्हें यह सम्मान 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में होने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस समारोह में वर्ष 2024 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।
अनंत नाग के लिए यह सम्मान उनके पांच दशक से अधिक लंबे उस सफर की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है, जिसमें उन्होंने रंगमंच से शुरुआत कर कन्नड़ सिनेमा की कई पीढ़ियों के साथ काम किया और भारतीय सिनेमा के विभिन्न रूपों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, कन्नड़ सिनेमा में योगदान के लिए मिलेगा सर्वोच्च सम्मान



