जयपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि दुनियाभर में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच भारतीय सेना की ऑपरेशन सिंदूर की संतुलित सैन्य कार्रवाई को इतिहास में भारत के साहस, शक्ति, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।
सिंह ने गुरुवार को यहां 78वें सेना दिवस समारोह में सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि आतंकवादियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई मानवीय मूल्यों का पूर्ण ध्यान रखते हुए और सावधानीपूर्वक आकलन के साथ की गई।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादी यह कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारतीय सशस्त्र बल इतनी बहादुरी और तेजी से उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैनिकों के साहस ने ही दुश्मन को किसी भी तरह की शरारत करने से रोका।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कठिन थीं और दबाव भी था, लेकिन जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ हमारे सैनिकों ने इस अभियान को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आतंकवादी विचारधारा के पूर्ण उन्मूलन तक शांति के लिए भारत के प्रयास जारी रहेंगे।
सिंह ने इस अभियान में स्वदेशी हथियारों के उपयोग को आत्मनिर्भरता की अनिवार्यता का प्रतीक बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता की दिशा में एक लंबा सफर तय कर चुका है और इसमें उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने आने वाले समय में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, युद्ध के बदलते आयामों को देखते हुए त्रि-सेवा समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना को अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अतुलनीय बलिदान का प्रतीक तथा विविधता में एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से, अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आने वाले युवा एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने देश की सामाजिक एकता को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया है। यह केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है। दुनिया की अधिकांश सेनाएं एक अलग क्षेत्र के रूप में कार्य करती हैं, लेकिन भारत में सेना और नागरिक साथ मिलकर कार्य करते हैं। जनता का अटूट विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है। यह विश्वास ही राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है।
रक्षा मंत्री ने जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सैनिकों के साथ संवाद किया तथा इसके बाद सेना दिवस समारोह के अंतर्गत दक्षिण पश्चिमी कमान के तत्वावधान में सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस संध्या में भारतीय सेना के शौर्य, परंपरा और परिचालन तत्परता का प्रदर्शन किया गया, जिसने सेना और नागरिकों के बीच के अटूट संबंध को और सुदृढ़ किया।



