त्रिशूर। केरल में मुनदाथिकोड में एक पटाखा इकाई में हुए भीषण विस्फोट में मारे गए लोगों की पहचान के लिए अधिकारियों ने डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार की इस त्रासदी के बाद यहां कई शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाए गए थे।
अधिकारियों ने कहा कि विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई पीड़ित पहचान में न आने की हद तक जल गए थे और शरीर के अंग काफी बड़े क्षेत्र में बिखर गए थे, जिससे आंखों से देखकर पहचान करना लगभग असंभव हो गया था।
न्यायालयिक टीमों ने अवशेषों से नमूने एकत्र किये हैं और पहचान स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण हेतु भेजा गया है। लापता व्यक्तियों के परिजनों से इस प्रक्रिया में सहायता के लिए डीएनए नमूने देने को कहा गया है। यह कार्य अस्पतालों और न्यायालयिक विभागों के माध्यम से समन्वित किया जा रहा है, ताकि अवशेषों का मिलान परिवार के सदस्यों से किया जा सके।
यह विस्फोट प्रसिद्ध ‘त्रिशूर पुरम’ की तैयारियों के दौरान एक ऐसी इकाई में हुआ जहां पटाखे तैयार किए जा रहे थे, जो कथित तौर पर तिरुवमबाडी अनुभाग के लिए थे। विस्फोट के समय घटनास्थल पर लगभग 35 से 40 श्रमिक मौजूद थे।
गंभीर रूप से झुलसे कई घायलों का उपचार त्रिशूर के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय सहित विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है, जहां कुछ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस शक्तिशाली विस्फोट ने आतिशबाजी तैयार करने के लिये इस्तेमाल होने वाले कई अस्थाई शेडों को नष्ट कर दिया और मलबे एवं मानव अवशेषों को काफी दूर तक बिखेर दिया।
बचाव कार्यों में बाद में हुए छोटे विस्फोटों और भंडारित पटाखों की अत्यधिक ज्वलनशील प्रकृति के कारण बाधा आई, जिससे दमकल और बचाव टीमों को शुरू में दूर से काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी या विस्फोटक सामग्री के आकस्मिक प्रज्वलन से यह विस्फोट हुआ होगा, हालांकि सटीक कारण की जांच अभी जारी है।
संभावित सुरक्षा चूक और नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए दंडाधिकारी जांच सहित एक विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। इस त्रासदी के बाद पीड़ितों के लिये आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिये दो लाख रुपए और घायलों के लिए 50,000 रुपए के मुआवजे की घोषणा की, जबकि राज्य सरकार ने राहत और चिकित्सा देखभाल के लिए आपातकालीन धनराशि जारी की है।



