नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए रोक लगा दी है। अब ममता बनर्जी और दूसरे गुट को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपने-अपने लिए तीन वैकल्पिक नाम और तीन चुनाव चिह्न प्राथमिकता क्रम में देने को कहा है। आयोग मौजूदा उपचुनावों के लिए अधिसूचित मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में से दोनों पक्षों को अलग-अलग चिह्न आवंटित करेगा। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों तक लागू रहेगी।
छह अक्टूबर को होना है उपचुनाव
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर टीएमसी के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग का आदेश सीधे तौर पर दोनों गुटों की चुनावी पहचान और प्रचार अभियान को प्रभावित करेगा।
चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर टीएमसी में दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं और दोनों खुद को वास्तविक पार्टी बता रहे हैं। ऐसे में चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत अंतरिम व्यवस्था करना आवश्यक है। आयोग ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य दोनों गुटों को समान स्थिति में रखना और उनके अधिकारों व हितों की रक्षा करना है।
ममता गुट और विरोधी गुट आमने-सामने
टीएमसी के भीतर पार्टी के संगठन, नेतृत्व और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद सामने आने के बाद दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के समक्ष अपने दावे रखे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का कहना है कि पार्टी का मौजूदा संगठन और उसका संविधान उसके पक्ष में है। वहीं विरोधी गुट ने संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी पर अपने अधिकार का दावा किया है। दोनों पक्षों के बीच राष्ट्रीय कार्यसमिति की वैधता और पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल किसी एक गुट को टीएमसी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न का अधिकार देने के बजाय दोनों को अलग-अलग पहचान देने का रास्ता अपनाया है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
आयोग के फैसले के बाद विपक्षी नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘पार्टी चोरी’ से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के विभाजन और चुनाव चिह्न को लेकर हाल के मामलों में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए फैसले की आलोचना की है। दूसरी ओर, विरोधी टीएमसी गुट की ओर से आयोग के फैसले का सम्मान करने और आगे की प्रक्रिया पर भरोसा जताने की बात कही गई है।
पहली बार चुनाव में ‘दो फूल’ वाला निशान नहीं
टीएमसी का पारंपरिक चुनाव चिह्न पश्चिम बंगाल की राजनीति में उसकी पहचान का प्रमुख हिस्सा रहा है। लेकिन चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में दोनों गुट इस आरक्षित चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। दोनों को अस्थायी तौर पर अलग नाम और अलग मुक्त चुनाव चिह्न दिए जाएंगे।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों गुटों ने खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए एक ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। अब मतदाताओं के सामने दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ होंगे।
आगे क्या होगा?
फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश अंतरिम प्रकृति का है। यानी इससे टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आयोग आगे दोनों पक्षों के दावों, दस्तावेजों और संगठनात्मक समर्थन की विस्तृत जांच के बाद अंतिम निर्णय ले सकता है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों गुटों को कौन-सा नाम और कौन-सा चुनाव चिह्न मिलता है। शुक्रवार सुबह 11 बजे तक दोनों पक्षों की ओर से दिए जाने वाले विकल्पों के बाद चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।



