कांग्रेस के समय की मनरेगा की विफलताओं का अंत है वीबी-जी राम जी : भजनलाल शर्मा

0

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को कांग्रेस पर वीबी-जी राम जी पर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाते हुए इसे कांग्रेस के समय की मनरेगा की विफलताओं का अंत बताया और कहा कि इस नए कानून से अब ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और टिकाऊ काम हो सकेंगे।

शर्मा ने यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि कांग्रेस इस ऐतिहासिक सुधार को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है जबकि यह सहकारी संघवाद का मॉडल है, जिसमें राज्यों की 40 प्रतिशत भागीदारी से जवाबदेही बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से काम कम होने का भ्रम फैलाया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि नए कानून से अब सुनियोजित ढंग से गांवों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से कार्य करवाए जाएंगे। पीएम गतिशक्ति से जुड़कर गांवों में पानी, स्थायी सड़कें और आवश्यक बुनियादी ढांचे के कार्य भी होंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भ्रामक और दुष्प्रचारपूर्ण आरोपों को बेनकाब करना आपकी और हमारी जिम्मेदारी है। साथ ही मोदी द्वारा जनहित में लाए गए वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 की खूबियों को जनता तक पहुंचाना होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 ग्रामीण रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी कानून से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई और गुणवत्तापूर्ण संपत्तियों का निर्माण हो सकेगा। यह कानून ग्रामीण रोजगार नीति को विकसित भारत के रोडमैप से जोड़ेगा और राजस्थान को भी इसका भरपूर लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से लाया गया था लेकिन कांग्रेस सरकार के कमजोर प्रशासन और भ्रष्टाचार के कारण यह अपने लक्ष्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सका। इसमें जनता के पैसे का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गलत मंशा के चलते मनरेगा के तहत किए गए अधिकांश कार्य गांवों की समग्र विकास योजनाओं से नहीं जुड़ पाए। इनमें अस्थायी सड़कों, अधूरी जल संरचनाओं और बिना योजना के मिट्टी के कार्य करवाए जाते थे जिनकी कोई दीर्घकालिक उपयोगिता नहीं थी।

उन्होंने कहा कि मनरेगा में फर्जी और डुप्लीकेट जॉब कार्ड, नकली लाभार्थी, मनगढ़ंत हाजिरी और मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं की जांच पड़ताल के लिए कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होने के कारण सोशल ऑडिट केवल औपचारिकता बनकर रह गई। प्रशासनिक व्यय की सीमा मात्र छह प्रतिशत होने से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाता था। वहीं बेरोजगारी भत्ता तथा देरी से भुगतान पर मुआवजे जैसे प्रावधान कागजों तक सीमित रह गए थे।

शर्मा ने कहा कि नए वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 में इन सभी कमियों को दूर किया गया है। अब सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर एक-दूसरे के पूरक हैं। कई छोटे किसान खेती भी करते हैं और मजदूरी भी करते हैं। खेती के दिनों में श्रमिकों को अतिरिक्त लाभ मिल सके, इसके लिए राज्य सरकारों को इस कानून में 60 दिनों का कार्य विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत जल संसाधन, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका अवसंरचना और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस व टिकाऊ कार्य कराए जाएंगे। जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। हर छह माह में डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य होगी। इसके साथ ही, निश्चित समय-सीमा वाली डिजिटल बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली और जिला लोकपाल की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिनियम के तहत मजदूरी का भुगतान हर सप्ताह करना अनिवार्य होगा और दो सप्ताह से अधिक देरी होने पर स्वतः मुआवजा मिलेगा। प्रशासनिक व्यय की सीमा को बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया गया है ताकि पर्याप्त स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ और जवाबदेह वित्तीय मॉडल पर आधारित वीबी-जी राम जी अधिनियम में हर वर्ष के लिए एक स्पष्ट और तय बजट निर्धारित किया जाएगा। मांग के अनुसार काम उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी। इसमें राज्यों को कुल 17 हजार करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त आवंटन होने की उम्मीद है।