अलवर। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक नकली पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश में बागपत जिले के कंडेरा निवासी सौरभ तोमर के रूप में हुई है। वह पेशे से सॉफ्टवेयर डवलपर इंजीनियर है।
उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को रात में सौरभ तोमर थाने आया और खुद को आईपीएस राजस्थान कैडर का होना बताकर उच्च स्तरीय होटल में ठहराने की व्यवस्था करवाने की मांग की। पुलिसकर्मियों को उसके सामान में मिले एक विजिटिंग कार्ड से उस पर संदेह हो गया और उससे पूछताछ की गई तो वह खुद को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का कमांडेंट बताने लगा। इस पर पुलिस का शक गहरा गया और उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसका भेद खुल गया।
इससे पहले उसने वर्तमान में खुद को एसपीजी में डेपुटेशन पर असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल रैंक पर पद स्थापित होना बताया और कहा कि वह आवश्यक राज कार्य से भिवाड़ी आया है और उसने थाने में आज कार्य से रात्रि होने के कारण विश्राम के लिए किसी फाइव स्टार होटल में कमरा बुक करवा कर रुकने की व्यवस्था करने के लिए कहा।
वहां तैनात पुलिस कर्मियों से अपने साथ ले वहां से सामान उतारने को कहा जिस पर हेड कांस्टेबल द्वारा उसका सामान उतारने लगा और गाड़ी में समान देखा तो बिखरा हुआ था। इस बैग में समेटने के दौरान एक यूडी ई ए सॉल्यूशन कंपनी के नाम का विजिटिंग कार्ड जिस पर सौरव तोमर को फाउंडर एवं सीटी ओ लिखा था। मोबाइल नंबर अंकित था। उसे व्यक्ति द्वारा स्वयं को आईपीएस बढ़कर कमरा बुक करने के लिए दिए गए मोबाइल नंबर के हूबहू था।
गाड़ी में इसके अलावा सौरभ कुमार का आधार कार्ड, पासपोर्ट, एक एचडीएफसी बैंक की चेक बुक जो बसंत कुंज नई दिल्ली के पते पर प्रेषित होकर प्राप्त हुई है। इस बिखरे हुए सामान को देखकर आईपीएस अधिकारी न होने की शंका हुई।
जिस पर डीओपी राजस्थान की सिविल लिस्ट में आईपीएस अधिकारी के विवरण में उक्त आईपीएस का विवरण देखा गया तो इस नाम का कोई भी आईपीएस अधिकारी उस लिस्ट में नहीं था। जब इस संबंध में उससे पूछा तो उसने उन्हें उनके पदस्थापन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त की गई तो स्वयं को आईपीएस के स्थान पर सी आई एस एफ कमांडेंट होना बताया जो वर्तमान में एसपीजी में एआईजी पद पर डेपुटेशन पर प्रतिस्थापित होना बताया गया।
उसका व्यवहार संदिग्ध होने पर उसे कड़ाई से पूछताछ की गई। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह आईपीएस अधिकारी बनकर टोल पर लगने वाले टोल टैक्स को उक्त लोक सेवक को मिलने वाली वैध छूट का फायदा लेकर आर्थिक लाभ के लिए काम करता था और आम जनता में रोब झड़ने के लिए इसलिए काम किया है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी आईपीएस अधिकारी का आई कार्ड, वायरलेस हैंडसेट, पासपोर्ट, आधार कार्ड, चेक बुक एवं अन्य कागजात जप्त किए हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से मिले मोबाइल फोन एवं लैपटॉप जिसमें संदिग्ध चैटिंग में डाटा की जानकारी माध्यम से जनता से पूछताछ की जा रही है।



