बेंगलूरु। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक के रामचंद्र राव से जुड़े वायरल वीडियो मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यालय में ड्यूटी के दौरान महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया।
आधिकारिक जांचों से पुष्टि हुई है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो असली हैं और डीपफेक, एआई-जनरेटेड या संपादित नहीं है, जिससे सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके अधिकारी गंभीर कानूनी संकट में फंस गए हैं।
कर्नाटक सरकार ने एडीजीपी आर हितेंद्र के नेतृत्व में चार आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम का गठन किया था जिससे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके। टीम ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि करते हुए लगभग 100 पृष्ठों की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। एफएसएल की रिपोर्ट भी पुष्टि करती है कि वीडियो असली हैं।
एफएसएल विशेषज्ञों ने विवादित वीडियो की जांच की और पाया कि उसमें कोई तकनीकी बदलाव या संपादन नहीं किया गया है। यह घटना 2016-17 के दौरान राव के कार्यालय में घटी थी, जब वे बेलगावी रेंज के आईजीपी के रूप में कार्यरत थे। उस समय ड्यूटी पर मौजूद चालकों एवं कार्यालय कर्मचारियों ने वीडियो में दिख रही महिलाओं की पहचान की और पुष्टि की कि वे कभी-कभी राव के निजी कार्यालय में आती थीं।
सूत्रों के अनुसार दोनों महिलाओं में से एक ने अनजाने में या जानबूझकर वीडियो रिकॉर्ड किया होगा, हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद दोनों महिलाएं लापता हो गई हैं। वर्तमान में चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए उनकी गवाही बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिसके लिए पुलिस ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि होने के बाद, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने राव को आधिकारिक नोटिस जारी कर विभागीय जांच शुरू कर दी है। वह 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं लेकिन वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार जांच पूरी होने तक उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। इससे पहले राव ने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि बदमाशों ने एआई तकनीक का उपयोग करके उन्हें साजिश में फंसाया है।



