चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के बीच अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) विधानसभा चुनाव परिणामों में बढ़त बनाए हुए है, जिससे दशकों पुराने द्रविड़ राजनीति के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
फिल्मी पृष्ठभूमि से आने वाले विजय के पिता एसए चंद्रशेखर जाने-माने फिल्म निर्देशक रहे हैं, जबकि उनकी माता शोभा चंद्रशेखर पार्श्व गायिका हैं। तीन दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में विजय ने 65 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और वह देश के सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाले अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
थलापति के नाम से लोकप्रिय विजय ने विशेषकर 2010 के दशक के बाद लगातार सफल फिल्मों के जरिए खुद को एक बड़े जननायक के रूप में स्थापित किया। उनकी फिल्मों का पहला दिन उत्सव जैसा होता रहा है और उनकी लोकप्रियता ने एक संगठित फैन बेस को जन्म दिया, जो आगे चलकर उनके राजनीतिक नेटवर्क में परिवर्तित हुआ।
विजय ने 2024 में राजनीति में औपचारिक प्रवेश करते हुए तमिलगा वेट्री कषगम की स्थापना की और फिल्मी करियर से संन्यास लेने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में आंशिक नहीं बल्कि पूर्णकालिक समर्पण आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार द्रविड़ राजनीति के दिग्गज नेताओं जे. जयललिता और एम. करुणानिधि के बाद उत्पन्न नेतृत्व शून्य, शासन से जुड़ी शिकायतें, कानून-व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों ने विजय के लिए अवसर तैयार किया।
टीवीके ने चुनाव में किसी बड़े गठबंधन के बजाय अकेले मैदान में उतरने का निर्णय लिया, जिसे मतदाताओं, विशेषकर युवाओं और महिलाओं ने सकारात्मक रूप से लिया। पार्टी नेतृत्व का मानना रहा कि पारंपरिक दलों के प्रति असंतोष निर्णायक जनादेश में बदल सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और सत्ता का संबंध पुराना रहा है। एम. जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे फिल्मी सितारे मुख्यमंत्री बने, जबकि अन्य सितारों के प्रयास मिश्रित रहे। विजय का उभार इसी परंपरा की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
विजय की राजनीतिक छवि उनके फिल्मी व्यक्तित्व का विस्तार मानी जा रही है। पर्दे पर नेता, रक्षक और जननायक की उनकी छवि वास्तविक जीवन में भी उनके समर्थकों के बीच बनी रही। उनके फैन क्लब धीरे-धीरे जमीनी संगठन में बदलते गए, जिसने उनकी राजनीतिक यात्रा को आधार दिया।
वर्ष 2021 में मतदान के दौरान साइकिल से मतदान केंद्र पहुंचने की घटना को भी उनके सार्वजनिक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया था, हालांकि उस समय इसे औपचारिक रूप से नकारा गया था। वर्तमान चुनावी परिदृश्य में विजय का उभार राज्य की पारंपरिक द्विदलीय राजनीति के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विजय अपनी लोकप्रियता को स्थायी राजनीतिक समर्थन में बदलने में सफल रहते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।



