अजमेर। हिन्दू जनजागृति समिति के मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने कहा कि हमें लंबे समय से एक गलत नैरेटिव में फंसाया गया है। घर का भेदी लंका ढहाए जैसी कहावत को विश्वासघात के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि लंका दहन घर का नहीं, अधर्म का दहन था।
दो दिवसीय अजमेर प्रवास पर आए डॉ. चारुदत्त पिंगले शुक्रवार को आदेश सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभीषण ने भगवान श्रीराम के आदर्शों के अनुसार धर्म के पक्ष में खड़े होकर सत्य का मार्ग चुना, जो सनातन धर्म की मूल भावना को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि अब जो जीता वही सिकंदर जैसी सोच से बाहर निकलकर जो जीता वही चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे राष्ट्रनायक आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता है।
शहर के शालिग्राम मंदिर, गुलाब बाड़ी अजमेर में कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले को पुष्पमाला पहनाकर किया गया। आदेश सेवा समिति ने सद्गुरु डॉ. पिंगले का सत्कार किया। बैठक में राजस्थान के समिति समन्वयक आनंद जाखोटिया ने सद्गुरु डॉ. पिंगले का परिचय वहां उपस्थित युवाओं एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से कराया।
अपने उदबोधन में सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने अभिभावकों से आग्रह किया कि संस्कारों की शुरुआत अपने घर के बच्चों से की जाए। बच्चों को नियमित रूप से संस्कार वर्गों से जोड़ें, ताकि उनका चरित्र निर्माण हो सके। सनातन धर्म की प्रत्येक परंपरा शास्त्र एवं विज्ञान पर आधारित है। यदि इन्हें समझकर अपनाया जाए तो शरीर, मन और जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। इस अवसर पर आदेश सेवा समिति के सदस्य व समाजसेवी उपस्थित रहे।



