ईरानी युद्धपोत : भारतीय नौसेना ने कहा मदद का संदेश मिलते ही शुरू कर दिए थे बचाव के प्रयास

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नई दिल्ली। हिन्द महासागर में श्रीलंका के निकट बुधवार को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर अमरीकी हमले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया है कि मदद का संदेश मिलते ही उसने खोज और बचाव प्रयास शुरू कर दिए थे।

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने ईरान के इस युद्धपोत पर बुधवार को टारपीडो से उस समय हमला किया जब यह भारत में पिछले महीने आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह और मिलन अभ्यास में शामिल होने के बाद वापस लौट रहा था। इस युद्धपोत पर ईरानी नौसेना के करीब सवा सौ नौसैनिक सवार थे।

नौसेना ने गुरुवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि बुधवार तड़के आईआरआईएस डेना से एमआरसीसी कोलंबो को एक संकट संदेश मिला था। यह युद्धपोत गाले से 20 समुद्री मील पश्चिम में उस खोज और बचाव क्षेत्र में था जो श्रीलंका की जिम्मेदारी के अंतर्गत आता है।

भारतीय नौसेना ने वक्तव्य में कहा है कि सूचना मिलते ही भारतीय उसने तुरंत अपने खोज और बचाव प्रयास शुरू किए और दस बजे एक लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान को भेजा, ताकि श्रीलंका द्वारा संचालित खोज अभियान को सहयोग दिया जा सके। इसके अतिरिक्त, हवा से गिराए जा सकने वाले लाइफ राफ्ट से लैस एक अन्य विमान को भी तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा गया।

इसके अलावा पास के क्षेत्र में तैनात आई एन एस तरंगिनि को भी बचाव प्रयासों में सहायता के लिए तैनात किया गया और वह चार बजे तक खोज क्षेत्र में पहुंच गया। तब तक श्रीलंका नौसेना और अन्य एजेंसियों द्वारा खोज और बचाव अभियान चलाया जा चुका था।

वक्तव्य में कहा गया है कि इसके अतिरिक्त आई एन एस इक्षक भी कोच्चि से रवाना हुआ है ताकि खोज अभियान को और मजबूत किया जा सके। यह जहाज़ क्षेत्र में लापता कर्मियों की तलाश जारी रखे हुए है। भारतीय नौसेना खोज और बचाव प्रयासों को लेकर श्रीलंका पक्ष के साथ समन्वय जारी रखे हुए है।