दुबई/रियाद। खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण तनाव के बीच शनिवार को सऊदी अरब, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर ईरान की ओर से ताजा ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों के लिए माफी भी मांगी।
इन हमलों के कारण पश्चिमी एशिया का हवाई क्षेत्र प्रभावित हुआ है और दुबई जैसे व्यस्त हवाई अड्डों पर परिचालन बाधित रहा। दुबई हवाई अड्डे पर शनिवार को कई ड्रोन हमले हुए, जिससे विमानों की आवाजाही कई घंटों तक ठप रही। इसके कारण क्षेत्र की प्रमुख विमानन कंपनी एमिरेटस ने विमान संचालन को रोकने का फैसला किया है।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने भी एक बैलिस्टिक मिसाइल हमले को विफल करने की पुष्टि की है, जिसके बाद दोहा में सुरक्षा अलर्ट जारी कर लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई। इसे देखते हुए कतर एयरवेज़ ने कहा है कि वह कल लंदन, पेरिस, मैड्रिड, रोम, फ्रैंकफर्ट और बैंकॉक से दोहा के हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए फ़्लाइट्स ऑपरेट करने का योजना बना रहा है। उसने कहा कि यह फ़ैसला कतर विमानन प्राधिकरण से अस्थाई अनुमति मिलने के बाद लिया गया।
वहीं बहरीन की सेना ने बताया कि हमलों की शुरुआत से अब तक उसने 86 मिसाइलों और 148 ड्रोनों को मार गिराया है। सऊदी अरब ने भी अपने विशाल ‘शयबाह’ तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे 16 ड्रोनों को शनिवार तड़के नष्ट करने का दावा किया है।
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सरकारी टेलीविजन पर एक संबोधन में पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगते हुए इसे एक असामान्य मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसियों पर हमला नहीं करना चाहता और भविष्य में तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक ईरान पर उन देशों की जमीन से हमला न हो।
राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों से ‘साम्राज्यवाद’ के हाथों की कठपुतली न बनने की अपील की, हालांकि उनके इस बयान के बाद भी क्षेत्र में हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही।
उन्होंने यह भी कहा ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के जवाब में कही उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” के, उसके साथ बातचीत नहीं करेगी। राजकीय टीवी पर जारी हुए भाषण में पेज़ेशकियन ने कहा कि वे हमारे बिना शर्त आत्मसमर्पण के सपने को अपनी कब्र में ले जाएंगे।
ईरानी सेना ने स्वीकार किया है कि उसने बहरीन और कतर में स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। लेकिन उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की खबरों का खंडन किया है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सामरिक जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुला है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और इजराइल के जहाजों को सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। ईआरजीसी ने शनिवार को प्राइमा नामक एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी भी ली, जिसने कथित तौर पर ईरानी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कई अरब देशों पर हुए कथित ईरानी हमलों पर चर्चा करने के लिए अरब लीग के विदेश मंत्रियों की एक आपात बैठक रविवार को होगी। अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने शनिवार को यह घोषणा की और कहा कि यह महत्वपूर्ण सत्र वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
जकी के अनुसार इस आपातकालीन बैठक का अनुरोध कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र जैसे प्रमुख सदस्य देशों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। बैठक का मुख्य एजेंडा खाड़ी क्षेत्र के देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को निशाना बनाने वाले हालिया हमलों की समीक्षा करना और इस दिशा में एक साझा अरब रुख निर्धारित करना है।
इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने शनिवार तड़के ईरान की राजधानी तेहरान और मध्य ईरान के कई खास सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इनमें एक भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल कारखाने और एक प्रमुख सैन्य अकादमी को निशाना बनाया गया। आईडीएफ के अनुसार इस अभियान में 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और निर्धारित लक्ष्यों पर लगभग 230 बम गिराए।
इजरायली सेना ने बताया कि हमलों के मुख्य लक्ष्यों में एक विशाल भूमिगत केंद्र शामिल था, जिसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडारण और उत्पादन के लिए किया जाता था। इस केंद्र से ईरानी सशस्त्र बलों के सैकड़ों सैनिक अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे। सेना का दावा है कि इस स्थल के भीतर कई बंकर और शासन के महत्वपूर्ण सैन्य मुख्यालय भी स्थित थे।
इसके अलावा आईडीएफ ने मिसाइल भंडारण के एक अन्य ठिकाने को भी नष्ट कर दिया है। इसमें बंकर और लॉन्च करने का ढांचा मौजूद था। हमलों की इस श्रृंखला में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की सैन्य अकादमी, इमाम हुसैन विश्वविद्यालय को भी निशाना बनाया गया। इजराइल के अनुसार इस विश्वविद्यालय का उपयोग युद्ध के दौरान आईआरजीसी के लिए एक आपातकालीन जगह के रूप में किया जा रहा था।
युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश करने के साथ ही इजराइली सेना ने पूरे ईरान में हथियार उत्पादन केंद्रों पर हमले तेज करने की रणनीति अपनाई है। इनमें विशेष रूप से उन केंद्रों को लक्षित किया जा रहा है जहाँ मिसाइलें और लॉन्चर तैयार किए जाते हैं।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। इरावानी ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी के हवाले से बताया कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में 180 से अधिक बच्चों की मौत हुई है और 20 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचा है।



