ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान पहुंचने संबंधी पोस्ट को हटाया, वार्ता को लेकर संदेह की स्थिति

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तेहरान। ईरान और अमरीका के बीच युद्धविराम वार्ता में नया संकट पैदा हो गया है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमिरी मोघम ने गुरुवार को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता के संदर्भ में किया गया अपना एक सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिया है।

मोघम ने पहले पोस्ट किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात (10 अप्रैल) इस्लामाबाद पहुंचेगा। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि यह दौरा ईरानी जनता के बीच व्याप्त संदेह के बावजूद हो रहा है, क्योंकि इजराइल द्वारा लगातार युद्धविराम का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कूटनीतिक पहल को विफल करना है।

इस पोस्ट के हटाए जाने से युद्धविराम वार्ता की सफलता को लेकर लगाई जा रहीं अटकलें और तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि अमरीका और ईरान के बीच युद्धविराम से शांति की उम्मीदें जगी ही थीं कि इजराइल ने लेबनान में भीषण हमले शुरू कर दिए, जिसमें कम से कम 254 लोग मारे गए।

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने तेहरान की शांति योजना के उल्लंघन की कड़ी आलोचना की है। गालिबाफ ने कहा कि लेबनान में जारी हमलों, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन की घुसपैठ और ईरान के परमाणु संवर्धन के अधिकार को नकारे जाने के बीच युद्धविराम और बातचीत तर्कहीन है। गौरतलब है कि गालिबाफ को ईरान की ओर से शांति वार्ता का नेतृत्व सौंपा गया है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर गालिबाफ ने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव के तीन प्रमुख खंडों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अमरीका के प्रति हमारा गहरा ऐतिहासिक अविश्वास उसकी बार-बार की वादाखिलाफी से उपजा है, जो दुर्भाग्य से एक बार फिर दोहराया गया है।

गालिबाफ ने तीन मुख्य उल्लंघनों का उल्लेख किया। पहला, लेबनान में युद्धविराम लागू करने के पहले खंड का पालन नहीं करना। दूसरा, ईरान के फार्स प्रांत के लार शहर में एक घुसपैठिया ड्रोन का प्रवेश, जो हवाई क्षेत्र के उल्लंघन न करने की शर्त का सीधा उल्लंघन है। तीसरा, ईरान के संवर्धन के अधिकार को नकारना, जो समझौते के छठे खंड में शामिल था। गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि जब वार्ता का मूल आधार ही स्पष्ट रूप से तोड़ा जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में द्विपक्षीय युद्धविराम या बातचीत करना अनुचित है।