जनचेतना मंच भीलवाड़ा शाखा द्वारा रामराज्य विषय पर संगोष्ठी
भीलवाड़ा। भारत को स्वाधीन हुए 75 साल से अधिक समय बीत गया पर अब भी अंग्रेजो द्वारा बनाए गए कई कानून प्रभावी होने से सनातन संस्कृति के समक्ष चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है। स्थिति यह है कि हम अंग्रेजी संस्कृति से मुक्त नहीं हो पा रहे है।
बदलाव के इस दौर में अब जरूरत है एक देश, एक विधान के लिए आवाज बुलंद करने की। पूरे हिन्दुस्तान से एक देश एक विधान का सुर गूंजना चाहिए। ये विचार प्रख्यात चिंतक एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शनिवार को यहां जनचेतना मंच राजस्थान की भीलवाड़ा शाखा की ओर से ‘रामराज्य’ विषय पर संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए कही।
करीब एक घंटे ज्वंलत मुद्दों व राष्ट्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर बेबाक उदबोधन में उपाध्याय ने कहा कि सांसद हो या विधायक हमारे जनप्रतिनिधियों पर इस बात के लिए दबाव बनाना होगा कि वह संसद ओर विधानसभा में अंग्रेजों द्वारा बनाए सनातन विरोधी कानूनों ओर ऐसे प्रावधानों को बदलें जो राष्ट्र में बहुसंख्यक समाज के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुके हैं।
हिन्दुस्तान में किसी धर्म विशेष के लिए अलग कानूनी प्रावधान नहीं हो, इसके लिए सभी को मिलकर एक राष्ट्र एक विधान की आवाज बुलंद करनी होगी। हमें बंटना नहीं है पर अब घटने से रोकना होगा। यदि हमे बंटे नहीं पर घटते चले गए तो कटने से कोई नहीं रोक पाएगा। हिन्दू आबादी घटने के दुष्परिणाम बांग्लादेश में इन दिनों देखने को मिल रहे है जहां हिन्दु एक होने के बावजूद स्वयं की रक्षा नहीं कर पा रहा है।
उपाध्याय ने कहा कि हमें संसद से लेकर चौपाल तक समस्याओं पर नहीं समाधान पर चर्चा करने की जरूरत है। जब तक समाधान पर चर्चा नहीं होगी समस्या सुलझ नहीं पाएगी। देश में हो रही अवैध घुसपैठ पूरी डेमोग्राफी को बदल रही है। इस घुसपैठ को रोकने के लिए उस भ्रष्टाचारी व्यवस्था पर लगाम कसनी होगी जिसमें कुछ रुपए देकर देश में प्रवेश मिलने से लेकर जरूरी दस्तावेज तक बन जाते हैं। भारत में अब तक करोड़ों लोग घुसपैठ करके विभिन्न क्षेत्रों में फैल चुके हैं और वोटों की चाह रखने वाले उनको संरक्षण देते है।
राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर कई जनहित याचिका लगा चुके अधिवक्ता उपाध्याय ने कहा कि भारत की उस व्यवस्था को बदलना होगा जिसमें मंदिर ओर मठ सरकारी नियंत्रण में आते हैं पर अन्य धर्मो के पूजा स्थल उससे बाहर है। ऐसे करीब चार लाख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर वहां आने वाले पैसे से ही गौसेवा से लेकर मानव सेवा तक के कई कार्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मान्तरण रोकने के साथ घर वापसी के लिए अभियान चलाना होगा।
धर्म को मजहब एक शब्द नहीं है दोनों के भावार्थ अलग-अलग है पर हमारी अंग्रेजी संस्कृति प्रधान न्यायिक व्यवस्था इसे एक तराजु में रख देती है। धर्म कभी भेदभाव नहीं सिखाता ओर कभी दूसरों को समाप्त करने की बात नहीं करता पर मजहब खुद को श्रेष्ठ मान दूसरों को आगे बढ़ने से रोकने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत हिन्दु धर्मावलम्बियों को भी उनके देवताओं के प्रतीक चिन्ह रूपी त्रिशूल, कुल्हाड़ी, तलवार, गंडासा आदि रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
करोड़ों की आबादी वाले अल्पसंख्यक कैसे हो सकते
संगोष्ठी में अधिवक्ता उपाध्याय ने बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक से जुड़े मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक कौन है यह तय करना होगा। अल्पसंख्यक उस कहते है जिसकी आबादी कुछ लाख तक रह गई हो। दुनिया के किसी मुल्क में ऐसा नहीं है जहां करोड़ों की आबादी वाला समाज अल्पसंख्यक होने के नाम पर विशेष सुविधाएं प्राप्त कर रहा हो। भारत में सरकार को अल्पसंख्यक के नाम पर दी जाने वाली सुविधाएं समाप्त कर सभी नागरिकों को एक समान अधिकार और कर्तव्य सुनिश्चित करने चाहिए। मजहबी आधार पर बनी संस्थाओं को कोई सरकारी सहायता नहीं मिलनी चाहिए। किसी धर्म विशेष के लिए अलग शिक्षा का प्रावधान नहीं होकर एक राष्ट्र एक पाठ्यक्रम तय होना चाहिए।
विधायक कोठारी मंच से उतर श्रोताओं में बैठ गए
संगोष्ठी में उस समय करतल ध्वनि गूंज उठी जब वरिष्ठ चिंतक अश्विनी उपाध्याय का उदबोधन सुनने के लिए भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी मंच से उतर श्रोताओं की दूसरी पंक्ति में जाकर बैठ गए। उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने जीवन में ऐसा विधायक पहली बार देखा है। संगोष्ठी में मंच पर हरिशेवाधाम के महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज, जनचेतना मंच राजस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आईएम सेठिया, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड, वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष मदन खटोड़, हिन्दू जागरण मंच के प्रान्त सह संयोजक बनवारीलाल व्यास व जनचेतना मंच राजस्थान के महासचिव लोकेश व्यास मंचासीन थे।
संगोष्ठी का संचालन सीताराम सोनी ने किया। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का भीलवाड़ा जिला अभिभाषक संस्थान के अध्यक्ष उम्मेदसिंह राठौड़ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने भी स्वागत किया। राजेन्द्र ओस्तवाल, डॉ. शंकरलाल माली, हनुमान अग्रवाल, बद्रीलाल सोमानी, ललित अग्रवाल, रामनरेश विजयवर्गीय, महेन्द्र सिंघवी, कल्पेश चौधरी, रमेश मूंदड़ा, परिवेश डाड ने भी उपाध्याय का स्वागत किया। आभार जनचेतना मंच के जिलाध्यक्ष उच्छब सोनी ने व्यक्त किया।




