अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित श्री नवदुर्गा नौसर माता मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ से पूर्व गुरुवार को गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर इस यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरा वातावरण मां महालक्ष्मी के जयकारों से गूंज उठा।
कलश यात्रा का शुभारंभ पुष्कर रोड स्थित बाबा रामदेव मंदिर से शाम करीब 5 बजे विधिविधान के साथ हुआ। पूजा-अर्चना के बाद ढोल-नगाड़ों और बैंड की मधुर धुनों के बीच कलश यात्रा आगे बढ़ी। पारंपरिक राजस्थानी साफा पहने यजमान ध्वज लेकर अग्रिम पंक्ति में चल रहे थे। उनके पीछे माता लक्ष्मी का स्वरूप धारण किए एक बालिका घोड़े पर सवार आकर्षण का केंद्र बनी रही।
यात्रा में शामिल महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। लाल और पीले परिधान में सजी-धजी सौ से अधिक महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाते श्रद्धा के साथ आगे बढ़ती नजर आईं। यात्रा के अंतिम हिस्से में सुसज्जित राजसी बग्घी में नौसर माता मंदिर के पीठाधीश्वर रामाकृष्ण देव एवं उदासीन मंगल आश्रम टोडली (अलवर) के महंत ब्रह्म मुनी महाराज विराजमान थे। यज्ञाचार्य पंडित आरके शास्त्री के साथ बूंदी पंडित दीनदयाल शास्त्री, भीलवाड़ा से रघुनंदन शास्त्री, पंडित राहुल गौड़ समेत गणमान्य शामिल रहे।
भजन-कीर्तन और गाजे-बाजे के साथ निकली यह यात्रा पुष्कर रोड, नौसर घाटी और पुष्कर घाटी से होते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंची। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया। यज्ञ स्थल पर पहुंचकर महिलाओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर विधिवत कलश स्थापना की, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
शाम करीब 7 बजे यज्ञाचार्य पंडित राजेश कुमार शास्त्री के सान्निध्य में महालक्ष्मी की आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लखनऊ से आए कलाकार हिमांशु शुक्ला ने लक्ष्यार्पण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।
इससे पहले सुबह 8 बजे यज्ञ स्थल पर यज्ञाचार्य पंडित राजेश कुमार शास्त्री ने दसविध स्नान, हिमाद्रि संकल्प तथा प्रायश्चित हवन कराया गया। उसके बाद गणपति षोडश मातृका आदि मंडलस्थ देवताओं की स्थापना की गई।
24 अप्रैल से यज्ञ की विधिवत शुरुआत
आयोजन समिति के अनुसार 24 अप्रैल से यज्ञ की विधिवत शुरुआत होगी। सुबह 8 बजे बगलामुखी अष्टमी पर आवाहित देव पूजन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ होगा, जबकि 11 बजे अरणि मंथन एवं यज्ञ आरंभ किया जाएगा। दोपहर में संतों के आशीर्वचन होंगे और शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। आगामी 26 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात्रि 11 बजे तक यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर सकेंगे। मंदिर एवं यज्ञ समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस महायज्ञ में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।


