तीर्थराज पुष्कर से शुरू हुआ लोकमंथन यात्रा का तृतीय चरण
लोक संस्कृति, खेल और ‘हम भारत के लोग’ विषय पर मंथन
पुष्कर/अजमेर। राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपराओं, लोक कलाओं और सामाजिक चेतना को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से निकाली जा रही लोकमंथन यात्रा के तृतीय चरण का गुरुवार को पुष्कर से शुभारंभ हुआ। चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न जिलों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा 21 अक्टूबर को झालावाड़ के गुरांडी में संपन्न होगी। यात्रा के दौरान लोक संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, खेल और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
तृतीय चरण की शुरुआत सुबह पुष्कर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ हुई। सुबह करीब 8 बजे यात्रा से जुड़े लोगों ने ब्रह्मा मंदिर में दर्शन किए तथा पुष्करराज की पूजा-अर्चना की। इसके बाद यात्रा वाहन रैली के रूप में अजमेर की ओर रवाना हुई। करीब 10 बजे पुष्कर रोड स्थित आदर्श विद्या निकेतन पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया गया। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा में शामिल प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया।
इसके बाद यात्रा अजमेर शहर में प्रवेश करते हुए विभिन्न मार्गों से आगे बढ़ी। यात्रा का अगला पड़ाव राजकीय कन्या महाविद्यालय रहा, जहां सामाजिक संगठनों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान सहित देश की लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक लोक वाद्यों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को भारतीय लोक संस्कृति से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में ‘पधारो म्हारे देश’ की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया। आयोजन स्थल पर लोक संस्कृति से जुड़ी सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
राजस्थान के पारंपरिक खेलों ने खींचा ध्यान
लोकमंथन यात्रा के अजमेर कार्यक्रम में संस्कृति के साथ पारंपरिक खेलों को भी प्रमुखता दी गई। क्रीड़ा भारती की ओर से सतोलिया, लट्टू, लंगड़ी टांग, रस्साकशी, खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया गया। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को उन पारंपरिक खेलों से जोड़ना रहा, जो आधुनिक जीवनशैली और बदलते मनोरंजन के साधनों के कारण धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं। कार्यक्रम में जोधपुर से हरदयाल तथा जयपुर से जसवंत खत्री सहित लोकमंथन यात्रा से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नवीन कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं ने किया स्वागत
राजकीय कन्या महाविद्यालय में कार्यक्रम के बाद यात्रा आगे बढ़ी। सेशन कोर्ट के नवीन भवन के बाहर अधिवक्ताओं ने यात्रा का स्वागत किया और अगवानी की। इसके बाद यात्रा राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर परिसर पहुंची। यहां पुष्पवर्षा के साथ यात्रा का अभिनंदन किया गया। बोर्ड परिसर स्थित सभागार में अधिवक्ता परिषद और राजस्थान ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘हम भारत के लोग’ रहा। संगोष्ठी को मुख्य वक्ता जसवंत खत्री ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता जगदीश सिंह राणा ने की। इस मौके पर खाजूलाल चौहान, पुरुषोत्तम परांजपे, मुकेश अग्रवाल, हनुमान सिंह राठौड, नारायणलाल गुप्ता, मनोज बेहरवाल समेत अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
लोक परंपराओं को मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत : खत्री
संगोष्ठी में जसवंत खत्री ने कहा कि लोकमंथन यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि लोक जीवन और लोक परंपराओं को समाज की मुख्यधारा में स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविध लोक परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता में निहित है। गांवों और स्थानीय समुदायों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं, कलाओं, खेलों और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति को केवल उत्सवों तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक जीवन के साथ जोड़ने की जरूरत है। लोकमंथन यात्रा इसी दिशा में संवाद और जनभागीदारी का माध्यम बन रही है।
‘हम भारत के लोग’ में निहित है राष्ट्र की सामूहिक शक्ति : कुमावत
लोकमंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने यात्रा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थान के विभिन्न जिला केंद्रों से निकलने वाली लोकमंथन यात्राओं का उद्देश्य प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं, शिक्षा, साहित्य, खेल और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देना तथा समाज के विभिन्न वर्गों को इन विषयों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि प्रत्येक क्षेत्र की अपनी लोक परंपरा, कला और सामाजिक विशेषता सामने आ सके।
कुमावत ने ‘हम भारत के लोग’ की अवधारणा को भी यात्रा का महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त यह वाक्यांश केवल शब्द नहीं है, बल्कि भारत के प्रत्येक नागरिक की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी और जिम्मेदारी को दर्शाता है। भारत के सभी नागरिक मिलकर राष्ट्र की आधारभूत शक्ति हैं। देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोते हुए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
21 अक्टूबर को झालावाड़ में होगा समापन
लोकमंथन यात्रा का तृतीय चरण 8 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर तक चलेगा। पुष्कर से शुरू हुई यात्रा अजमेर के बाद विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ेगी। प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय संस्कृति, लोक कला, शिक्षा, साहित्य, खेल और सामाजिक विषयों को केंद्र में रखकर कार्यक्रम होंगे। यात्रा का अंतिम पड़ाव झालावाड़ जिले का गुरांडी प्रस्तावित है, जहां 21 अक्टूबर को तृतीय चरण का समापन किया जाएगा।








