हरियाणा जाट आंदोलन : कोर कमेटी का रुख सख्त, आंदोलन करेंगे तेज

Haryana Jat quota agitation
Haryana Jat quota agitation

चंडीगढ़। हरियाणा में 29 जनवरी से धरने पर बैठे जाट समाज के लोगों ने सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाया है।

जाट नेताओं का आरोप है कि सरकार भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए जाट समुदाय के खिलाफ साजिश रच रही है। क्योंकि गत वर्ष के जाट आरक्षण आंदोलन में हुई हिंसा में भाजपा कार्यकर्ताओं भी शामिल थे।

इसके साथ ही जाट नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार द्वारा मुख्यसचिव के नेतृत्व में गठित वार्ता कमेटी के पास कोई अधिकार नहीं हैं। ऐसी अधिकारविहीन कमेटी के साथ अब आगे वार्ता नहीं होगी।

यही नहीं 26 फरवरी को जाट समाज के लोग व्यापक स्तर पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महिलाएं काली चुनरी व पुरुष काली पगड़ी पहनकर काला दिवस मनाएंगे।

शुक्रवार को रोहतक के जसिया में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के कोर कमेटी की बैठक हुई। जिसमें आंदोलन से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने पत्रकारों को बैठक के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा कि हमने हर वार्ता में समझौते करते समय कहा है कि सरकार सबके साथ एक जैसा व्यवहार करे। जब सरकार बीजेपी के कार्यकर्त्ताओं, नेताओं, अधिकारी व कर्मचारियों के साथ साथ सरकार राजकुमार सैनी की तथाकथित ब्रिगेड के लोगों को बचाना चाहती है, तब जाटों पर झूठे केस लगाकर उन्हें क्यों बदनाम करना चाहती है।

हमने हर बार सरकार से यही मांग की, कि व्यवहार सबके साथ एक जैसा हो। हरियाणा सरकार से वार्ता में गतिरोध का मुख्य कारण, सरकार वायदों पर आन्दोलन स्थगित कराना चाहती है जैसा 22 फरवरी 2016, 18 मार्च 2016 व 18 जून 2016 को वादे कर आन्दोलन को स्थगित कराया व उसके बाद उन माँगों को ना मानकर जाट समाज को धोखा दिया।

जबकि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का प्रस्ताव था कि जब तक वायदों को पूरा करने में समय लगे, तब तक धरनों पर कम संख्या में लोग रहें और जब वायदे पूरे हो जायें, तभी धरने स्थगित हों।

इस मांग पर सरकार का सहमत ना होना यह दर्शाता है कि सरकार अब भी चालाकी व धोखाधड़ी से काम निकालना चाहती है। इसके बाद मलिक ने कहा कि भविष्य में बिना अधिकारों वाली ऐसी कमेटी से बात नहीं करेंगे, जिनके पास मांगों पर समझौता करने का अधिकार ही ना हो।

सरकार के पास हमारी मांगें हैं, अगर वह उनको मानती है और सबके साथ समान व्यवहार करती है, तभी वार्ता सम्भव है। अगर झूठे मुकदमें वापिस नहीं ले सकती तो जल्द से जल्द असली दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दें और हिंसा क्यों हुई और बीजेपी के नेताओं व कार्यकर्त्ताओं व अधिकारी कर्मचारियों की साजिश की भी सीबीआई जांच हो। आगे आन्दोलन की गति घोषित कार्यक्रमों के अनुसार तेज की जाएगी।

उन्होंने बताया कि आगे आन्दोलन की गति बढ़ाने के साथ ही पूरे देश भर के जाट केन्द्र की सरकार पर भी इस बात का दवाब बनाया जायेगा कि या तो वह हरियाणा की सरकार को निर्देषित करे कि जाट समाज हरियाणा को न्याय मिले।

इसके अतिरिक्त, रोहतक-जसिया, अम्बाला (हुसैनी मोड़ नारायण गढ), सोनीपत (धरना 36 बिरादरी भाईचारा लाठ जौली चौकी), पानीपत (उग्राखेड़ी स्टेडियम), कैथल (देबन), फतेहाबाद (ढाणी गोपाल), कुरूक्षेत्र (लाडवा जैनपुर जट्टान), हिसार (मय्यड़), झज्जर (रासलवाला चौक), करनाल (बल्ला गांव), दादरी (सेक्टर-8), फरीदाबाद (ढींग गांव), भिवानी (धनाना), सिरसा (सेक्टर-19 हुड्डा), यमुनानगर (अनाज मण्डी जगाधरी), रेवाड़ी (प्राणपुरा-बस स्टैन्ड), महेन्द्रगढ़ (नांगल चौधरी), के धरनों पर 26 फरवरी 2017 “काला दिवस” के लिए जोर शोर से तैयारी चल रही हैं।

सभी धरनो पर 26 फरवरी 2017 को महिलाएं काली चुनरी और पुरूष काली पगड़ी पहन कर धरना स्थल पर पहुंचेंगे और सरकार के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन करेंगे।