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उदयपुर के साइंस काॅलेज में हंगामा, महिला प्रोफेसर के देवर ने की मारपीट

सबगुरु न्यूज उदयपुर। उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संघटक सांइस कॉलेज में गुरुवार को उस वक्त हंगामा हो गया जब एक महिला प्रोफेसर के देवर ने कॉलेज में घुसकर एक प्रोफेसर के साथ मारपीट कर दी। बाद में प्रोफेसर ने भी छात्रों के साथ मिलकर उस व्यक्ति की पिटाई कर दी।

दरअसल सांइस कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी पर पढ़ाने वाली अनिता मेहता ने उनके ही कॉलेज के प्रोफेसर राकेश्वर पुरोहित पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए।

अनिता के देवर तुषार मेहता प्रोफेसर राकेश्वर पुरोहित से बातचीत करने के लिए यहां पहुंचे थे। इसी दौरान झगड़ा के बढ़ने से दोनों ने एक-दूसरे के साथ मारपीट की दी। पुरोहित के समर्थक छात्रों ने भी मेहता के साथ जमकर मारपीट की।

सूचना पर मौके पर पहुंची भूपालपुरा थाना पुलिस ने मामला शांत करवा कर दोनों ही पक्षों की ओर से रिपोर्ट ली। वहीं प्रोफेसर पुरोहित के साथ हुई मारपीट बाद उनके समर्थन में आए प्रोफेसर एसोसिएशन ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है, जिस पर कॉलेज प्रबंधन की ओर से भी प्रोफेसरों से चर्चा कर समझाइश की गई।

मीडिया से बात करते हुए अनिता मेहता और तुषार ने प्रोफेसर पुरोहित पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने और जबरन मारपीट करने का आरोप लगाए। वहीं प्रोफेसर राकेश्वर पुरोहित ने उन पर लगे सभी आरोपो को झूठा करार दिया है।

न्यूरो नेविगेशन से कम हुआ न्यूरो सर्जरी का रिस्क

सबगुरु न्यूज उदयपुर। मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसमें एक छोटी सी गांठ या बीमारी भी बहुत नुकसानदायक हो सकती है। इसीलिए न्यूरोसर्जरी हमेशा ही बहुत रिस्की व जटिल विधा रही है।

फोर्टीस उदयपुर के न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डाॅ. अमितेन्दु शेखर ने गुरुवार को न्यूरो सर्जरी की जटिलताओं और उनके आज के दौर में सरल उपायों के बारे में पत्रकारों से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि अब तकनीक बदल चुकी है और न्यूरोसर्जरी में रिस्क कम हुए हैं। मस्तिष्क की शल्य चिकित्सा को आसान एवं सटीक बनाने के लिए अब एक नई तकनीक उपलब्ध है। जिसे न्यूरो नेविगेशन कहते हैं। न्यूरो नेविगेशन एक ऐसी तकनीक है जिससे कम्प्यूटर की सहायता से मस्तिष्क की सर्जरी की जाती है। यह तकनीक बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे कि मोबाइल का जीपीएस। जिस प्रकार जीपीएस के मार्गदर्शन में हम एम निश्चित जगह पर आसानी से पहुंच सकते हैं, उसी प्रकार नेविगेशन सिस्टम के मार्गदर्शन से सर्जन मस्तिष्क की संरचनाओं या ट्यूमर तक आसानी एवं सटीकता से पहुंच सकते हैं ताकि आसपास के ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचे।

सर्जरी के समय इस साॅफ्टवेयर के द्वारा यह पता लगाने में सहायता मिलती है कि कोई विशेष टूल एक निश्चित समय पर कहां काम कर रहा है। जिससे सर्जन को सही जगह पर कट लगाने में सहायता मिलती है। इस तकनीक के द्वारा कम से कम चीर-फाड़ करते हुए एक छोटे से छिद्र से अधिक बेहतर ढंग से एवं कम समय में सर्जरी की जा सकती है। जिसके कारण मरीज को ठीक होने में कम समय लगता है।

यह तकनीक भारत में ना बनने के कारण आम आदमी के लिए कम मूल्य में इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती मगर अब भारत में पहली बार बेंगलूरु की एक कम्पनी ने कई सालों की रिसर्च के बाद यह मशीन विकसित की है।

उदयपुर के धूलिया एनिकट में अधेड़ डूबा, कई घंटों बाद मिला शव

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सबगुरु न्यूज उदयपुर। उदयपुर के खेरोदा थाना क्षेत्र के कावड़िया का खेड़ा गांव के धूलिया एनिकट में गुरुवार को अधेड़ डूब गया।

आॅटिज्म डिस आॅर्डर के उपचार में स्टेमसेल थैरेपी से बढ़ी उम्मीद

सबगुरु न्यूज उदयपुर। आॅटिज्म स्पेक्ट्रम डिस आॅर्डर से ग्रसित बच्चों के लिए स्टेमसेल थैरेपी नई उम्मीद लेकर आई है।

यह जानकारी मुम्बई के न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डाॅ. आलोक शर्मा ने गुरुवार को उदयपुर में पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि आॅटिज्म के उपचार के लिए वे न्यूरोजेजन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट आॅटिज्म के उपचार में भारत का एकमात्र स्टेमसेल थैरेपी का केन्द्र है। अब तक यह इंस्टीट्यूट इस तकनीक से दुनिया भर के एक हजार से अधिक आॅटिस्टिक बच्चों के इलाज की पेशकश कर चुका है। उन्होंने बांसवाड़ा के 7 वर्षीय अदनान तबरान को भी पत्रकारों के समक्ष प्रस्तुत किया जो पूर्व में बोलता तक नहीं था। अब वह मोबाइल पर गेम भी खेलता है।

डाॅ. शर्मा ने बताया कि थैरेपी में मरीज की बोन मैरो में से स्टेम सेल अलग कर उन्हें फिर से उसी मरीज के शरीर में स्पाइन में निर्धारित जगह पर प्रवेश कराया जाता है। इसके बाद कुछ और भी जरूरी अभ्यास होते हैं जिन्हें बच्चे की मां को सिखाया जाता है जिससे वे घर पर भी कर सकें।

उन्होंने बताया कि 10 साल तक की उम्र तक उपचार लेने पर परिणाम अच्छे आते हैं। उसके बाद 20 साल तक की उम्र में ठीक-ठाक परिणाम मिलते हैं, लेकिन इसके बाद उम्र बढ़ने पर परिणाम उतने अच्छे नहीं होते, क्योंकि तब तक मस्तिष्क विकसित होकर स्थायी आकार ले चुका होता है। डाॅ. शर्मा ने कहा कि इस उपचार पद्धति में आणविक, संरचनात्मक ओर कार्यात्मक स्तर पर क्षतिग्रस्त तंत्रिका ऊतकों की मरम्मत की क्षमता है।

उदयपुर का उदयसागर छलकने से दो फीट दूर

उदयपुर की फतहसागर झील से छलकती जलराशि

सबगुरु न्यूज उदयपुर। उदयपुर की प्रसिद्ध फतहसागर झील लबालब होने के बाद अब उदयसागर झील के छलकने की उम्मीद बढ़ गई है।