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सपा से अभी और लोग इस्तीफा देंगे : बुक्कल नवाब

Feeling suffocated : Samajwadi Party leader Bukkal Nawab resigns
Feeling suffocated : Samajwadi Party leader Bukkal Nawab resigns

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य बुक्कल नवाब ने पार्टी और राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की और कहा कि उनका सपा में दम घुट रहा था। उन्होंने कहा कि सपा से अभी और लोग भी इस्तीफा देंगे।

भारत 2026 तक विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक होगा

India to be world's biggest milk producer by 2026
India to be world’s biggest milk producer by 2026

संयुक्त राष्ट्र। भारत आगामी दशक में दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन जाएगा। इस सदी की पहली तिमाही के दौरान ही देश का दुग्ध उत्पादन तीन गुना हो चुका है। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और आर्थिक सहयोग संगठन (ओईसीडी) ने यह खुलासा किया है।

मादक पदार्थ तस्करी मामले में SIT की रवि तेजा से पूछताछ

SIT begins questioning Ravi Teja in drug case
SIT begins questioning Ravi Teja in drug case

हैदराबाद। हैदराबाद मादक पदार्थ तस्करी रैकेट मामले में तेलुगू अभिनेता रवि तेजा शुक्रवार को विशेष जांच टीम (एसआईटी) के समक्ष पेश हुए। अभिनेता तेलंगाना के निषेध एवं उत्पाद शुल्क विभाग के कार्यालय आबकारी भवन सुबह 10 बजे के आसपास पहुंचे।

बांसवाड़ा में 59 घुमक्कड़ परिवारों को मिलेगा पक्का आशियाना

बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना ने पूरी की आस

लोधा पंचायत की पहल पर प्रशासन ने आवंटित की भूमि

सबगुरु न्यूज. उदयपुर। ‘‘हम 55 सालों से भटक रहे हैं, 1962 से हमारे बाप-दादा कमर्शियल काॅलोनी में रहते थे, उसके बाद 1999 में हमें वहां से बेदखल किया तो हम शारदा काॅलोनी में बसे और वहां से 2006 में हमें हटाया तो हम यहां आकर बसे। हर किसी ने हमें दुत्कारा परंतु अब प्रधानमंत्री आवास योजना में हमें सरकार द्वारा निःशुल्क जमीन देकर मकान बनाने के लिए राशि दी जा रही है। हमें अब लग रहा है कि हमारे बच्चों को स्थाई ठौर मिल जाएगा।’’

यह कहना है उदयपुर संभाग के जनजाति बहुल क्षेत्र बांसवाड़ा शहर से सटी ग्राम पंचायत लोधा की कच्ची बस्ती में रह रहे चिकलीगर लोहार जाति के 59 घुमक्कड़ परिवारों का। घुमक्कड़ जीवनयापन करने वाले इन परिवारों को हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली है। परंतु इनके खाते में भूमि का अभाव होने के कारण इनको मकान बनाने में तकलीफ आ रही थी। ग्राम पंचायत लोधा ने इन घुमक्कड़ परिवारों की तकलीफ को समझा और इनको निःशुल्क भूमि आवंटन के लिए जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद के पास प्रस्ताव भेजा। फिलहाल एक नहर के किनारे टीन और घासफूंस के छप्परों में रह रहे इन परिवारों के बारे में जानकर कलक्टर ने भी संवेदनशीलता दिखाई। कलक्टर के निर्देश पर इन 59 परिवारों के लिए ग्राम पंचायत में जानामेड़ी गांव में 6.03 बीघा जमीन आवंटित कर दी गई। अब नगरपरिषद से आवास निर्माण के लिए एनओसी प्राप्त होते ही ग्राम प्रशासन द्वारा इन परिवारों को पट्टों का आवंटन कर दिया जाएगा। इन परिवारों को जब प्रशासन द्वारा जमीन आवंटित करने के बारे में जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं था और वे बार-बार सरकार और ग्राम पंचायत प्रशासन का आभार करते हुए नहीं थक रहे थे।

काॅलोनी बनेगी, नाम पीएम आवास काॅलोनी

इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ग्राम पंचायत लोधा के सचिव अशोक सुथार का कहना है कि इन 59 परिवारों के लिए उन्होंने काॅलोनी निर्माण का मास्टरप्लान भी तैयार कर लिया है। इन सभी परिवारों के आवास एक जैसे बनेंगे और इस काॅलोनी का नाम पीएम आवास काॅलोनी रखने का निर्णय ग्राम पंचायत द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्राम पंचायत को 215 आवास का लक्ष्य दिया गया था और इस वर्ष अब तक 32 आवास स्वीकृत हो चुके हैं। घुमक्कड़ परिवारों को भूमि आवंटन से आवास भी अब जल्द बन जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सरपंच ममता बामनिया, समाजसेवी प्रकाश बामनिया, विजयलाल बामनिया और घुमक्कड़ परिवारों में से एक श्यामा पटवा ने जी-जान लगाई। उम्मीद है कि 6 महीने में इन सभी को स्थाई ठिकाना मिल जाएगा।

खुशी से फूला नहीं समा रहा श्यामा

वर्तमान में मयूर मिल के पीछे नहर किनारे और हाईटेंशन लाइन के नीचे रह रहे चिकलीगर लोहार जाति के घुमक्कड़ परिवारों में एक लाभार्थी श्यामा पटवा का कहना है कि बरसों से वे मौत के साये में रह रहे थे, किसी ने उन पर ध्यान नहीं दिया। अब सरकार की नजरें पड़ी हैं। व्यवस्थित काॅलोनी में पक्के मकान मिल जाते हैं तो उनका जीवन आसान हो जाएगा। इसी काॅलोनी की वृद्धा राधा कौर का कहना है कि एक चिड़िया भी होती है तो वह घौंसला बनाकर रहती है, आखिर हम तो इंसान हैं। गंदगी भरे घरों में रहने से बच्चों में बीमारियां हो रही थी। अब सरकार की मेहर हुई है।
समाजसेवी प्रकाश बामनिया का कहना है कि एक बच्चे की हाईटेंशन लाइन का करंट लगने से मौत हो गई थी तो दो बच्चे नहर में भी बह गए थे। यह जमीन भी पुलिस प्रशासन के नाम आवंटित है ऐसे में यहां से भी इनको कभी भी हटाए जाने का खतरा था। अब चिंता दूर हो गई है।

300 अन्य परिवारों को भी मिलेंगे पट्टे

अन्य विभिन्न जातियों के 300 परिवारों को भी पट्टे मिलेंगे। बांसवाड़ा जिला कलक्टर ने ग्राम पंचायत के जानामेड़ी गांव के 265 परिवारों तथा लोधा डूंगरी के 35 परिवारों के लिए क्रमशः 175.16 बीघा तथा 10 बीघा जमीन आवंटित की है। सचिव अशोक सुथार ने बताया कि चिकलीगर लोहार के 59 परिवारों के लिए आवंटित 6 बीघा जमीन के साथ ही शेष जमीन के लिए ग्राम पंचायत ने कुल 4 लाख 65 हजार 487 रुपए भी चालान के लिए जमा करा दिए हैं। जमीन आवंटन के साथ ही इन समस्त परिवारों को पंचायत द्वारा निःशुल्क पट्टे आवंटित कर दिए जाएंगे ताकि भविष्य में इन परिवारों को सरकार की योजनाओं में आवास की स्वीकृति पर मकान बनाने में आसानी हो।

उदयपुर सांसद ने लोकसभा में उठाया हिंदुस्तान जिंक को आवंटित कोयले से जुड़ा प्रश्न

सबगुरु न्यूज.उदयपुर। उदयपुर सांसद अर्जुन लाल मीणा ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से पिछले तीन वर्षों में हिंदुस्तान जिंक को आवंटित कोयले की मात्रा एवं उससे प्राप्त राजस्व की जानकारी मांगी है।

27 जुलाई को कोयला राज्य मंत्री की ओर से प्रश्न का उत्तर दिया गया जिसमें बताया गया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हिंदुस्तान जिंक को कुल 703.57 हजार टन कोयला आवंटित किया गया। बदले में 66.86 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया।

प्रस्तुत उत्तर में बताया गया कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड तथा हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मध्य ईंधन आपूर्ति करार है जिसके अनुसार जी-10 से जी-12 ग्रेड कोयला आपूर्ति किया जाएगा। वर्ष 2014-15 में 256.01 हजार टन कोयला आपूर्ति किया गया जिससे 24.32 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

इसी प्रकार 2015-16 में 435.81 हजार टन कोयले से 41.4 करोड़ एवं 2016-17 में 11.75 हजार टन कोयला आपूर्ति से 1.14 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अभी तक कोयला आपूर्ति नहीं हुई है।

सांसद के प्रश्न के जवाब में यह भी बताया गया कि कोयले को व्यापक रूप से कोकिंग एवं नॉन कोकिंग कोल के रूप मे वर्गीकृत किया गया है। कोकिंग कोल इस्पात उद्योगों एवं नॉन कोकिंग कोल अन्य उद्योगों में प्रयोग किया जाता है।