
हॉलीवुड सिंगर जेनेट का पति से दिल भरा, अब अलग होंगी!

नागिन-2 में आएंगी एक और नागिन
कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहा सीरियल नागिन 2 अपने रहस्य और रोमांच के चलते ही, दर्शकों कि पहली पसंद बना हुआ है। इस शो का पहला भाग भी काफी रहस्मय और रोमांचित कर देने वाला था। पहले भाग ने भी जहां टीआरपी में बढ़त बनाई थी, वहीं दूसरे भाग ने भी लॉंचिंग के साथ टीआरपी में खास जगह बना ली है।
अब बेबी डॉल के साथ मिलकर क्रिकेट कॉमेंट्री करेंगे डॉ. गुलाटी
कपिल शर्मा से हुई खटपट के बाद सुनील ग्रोवर किसी तरह का स्टेटमेंट देने के बजाए, लगातार अपने काम पर फोकस कर रहे है। पहले जहां उन्होंने डॉ. मशहूर गुलाटी बनकर दिल्ली में लाइव स्टेज शो किया, जिसमें उनका साथ कीकू शारदा ने दिया था। फिर सोनी टीवी के सिंगिंस रिएलिटी शो इंडियन आइडल 9 के फिनाले में उन्होंने डॉ. मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी के किरदारों से जमकर मनोरंजन किया।
सिने प्रेमियों को पसंद आएगी बेगम जान : विद्या बालन

मुंबई। बॉलीवुड में अपने संजीदा अभिनय के लिए मशहूर विद्या बालन का कहना है कि उनकी आने वाली फिल्म ‘बेगम जान’ सिने प्रेमियों को बेहद पसंद आएगी।
विध्वंस अौर आतंक पसंद है पाकिस्तान को : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने 1971 के बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दाैरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भारत का यह पश्चिमी पड़ोसी अभी भी हिंसा, आतंक और विध्वंस की नीति पर चल रहा है।
माेदी ने मुक्ति संग्राम के दौरान शहीद हुए सात भारतीय सैनिकों के परिजनों को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा सम्मानित किए जाने के यहां आयोजित एक समारोह में कहा कि दक्षिण एशिया में अभी भी एक दृष्टिकोण है जहां आतंक को सहेजने, प्रेरित और प्रोत्साहित करने का काम होता है। यह एक बड़ी चुनौती है।

हसीना ने किया सम्मान
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारतीय सशस्त्र सैनिकों के लिए अपने देश की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन सात भारतीय सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया, जो 1971 में बंगलादेश मुक्ति संग्राम में शहीद हो गए थे।
हसीना ने मॉनेकशा सेंटर में खचाखच भरे जोरावर हाल में कहा कि वह कुछ बहुत विशेष भारतीय मित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पर अत्यधिक सम्मानित महसूस कर रही हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 1971 के संग्राम में जीत उन लोगों की जीत का प्रतीक थी, जो मानवाधिकार और मानवीय मूल्यों में विश्वास करते थे।