
नोटबंदी के 1 महीने बाद जनधन खातों से निकले पांच हजार करोड़ रुपये

नई दिल्ली। 8 नवंबर को मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के एक महीने बाद जनधन खातों से 5,582.83 करोड़ रुपये निकले। 7 दिसंबर को जनधन खातों में जमा राशि 74,610 करोड़ रुपये थी। यह आंकड़ा इन खातों में जमा होने वाली राशि का अब तक अधिकतम था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट जारी है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 11 जनवरी को यह घटकर 69,027.17 करोड़ रुपये पर आ गई। 7 दिसंबर से 11 जनवरी की अवधि में जनधन खातों से कुल जमा में 5,582.83 करोड़ रुपये की कमी आई।
देश भर में कुल जनधन खातों की संख्या 26.68 करोड़ रुपये है। इन खातों का दुरुपयोग रोकने के लिए निकासी की मासिक सीमा 30 नवंबर से 10,000 रुपये तय की गई है। जनधन खातों में जमा की अधिकतम सीमा 50,000 रुपये है। 9 नवंबर को 500 और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य करार दिए जाने के बाद इन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये की राशि जमा थी।
नोटबंदी की घोषणा के एक महीने के भीतर जनधन खातों में जमा राशि में 28,973 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था। इस बीच, आधार से जुडे जनधन खातों की संख्या 11 जनवरी को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 15.36 करोड़ हो गई है, जो नोटबंदी के दिन 13.68 करोड़ थी।
FPI ने जनवरी में भारतीय बाजारों से निकाले 5,600 करोड़ रुपए

नई दिल्ली। विदेशी निवेशकों ने विभिन्न कारणों से भारतीय पूंजी बाजार से इस महीने अब तक 5,600 करोड़ रपये की निकासी की है। उन्हें लगता है कि दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि संभावना पहले से कमजोर लगती है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारतीय पूंजी बाजार से धन निकासी के लिये अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदली नीतियां और भारत में नोटबंदी को वजह माना जा रहा है। पहले सामान्य कर परिवर्जन नियमों गार के क्रियान्वयन को लेकर ब्यौरे की प्रतीक्षा थी लेकिन सरकार ने शुक्रवार को शंकाओं को काफी कुछ दूर करते हुये इसके क्रियान्वयन से संबंधित स्पष्टीकरण जारी कर दिया।
एफपीआई ने इससे पहले अक्तूबर से दिसंबर 2016 तिमाही में इक्विटी और रिण बाजार दोनों से कुल मिलाकर 77,000 करोड़ रपये की निवल आधार पर निकासी की है। जबकि इससे पहले एफपीआई ने भारतीय बाजारों में 20,000 करोड़ रपये का शुद्ध निवेश किया था।
बजाज कैपिटल समूह के सीईओ और निदेशक अनिल चोपड़ा ने कहा, ‘‘इस महीने जनवरी में एफपीआई की निकासी की वजह भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कमजोर पडऩे की संभावना बढऩा रहा है। निवेशको को लग रहा है कि विकसित देशों के साथ साथ अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीमी रहेगी।’’
इस महीने, 27 जनवरी तक, एफपीआई की इक्विटी निवेश से शुद्ध निकासी 2,139 करोड़ रपये रही है जबकि रिण बाजार से उन्होंने 3,465 करोड़ रपये की निकासी की है। कुल मिलाकर 5,604 करोड़ रपये भारतीय बाजार से निकाल लिये गये हैं। डिपाजिटरी के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
US-सऊदी अरब आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध

बैरूत। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के राजा सलमान ने आज टेलीफोन पर करीब एक घंटे तक बात कर दोनों देशों के बीच आतंकवाद, सैन्य सहयोग और आर्थिक संबंधो को बढ़ावा देने पर सहमति जतायी। यह जानकारी एक वरिष्ठ सऊदी सूत्र ने दी।
सूत्रों के अनुसार ट्रंप और राजा के बीच टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी जिसमें दोनों देश आतंकवाद, कट्टरता और इसके वित्तपोषण के विरूद्ध लड़ाई में सहभागिता बढ़ाने पर सहमत हुये।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की घोषणा सही समय आने पर की जायेगी। दोनों नेताओं ने आर्थिक मुद्दे पर बातचीत करने के साथ आशा जतायी कि इससे दोनों देशों में ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी। दोनों देशों ने क्षेत्र र्में इरान से संबंधित नीतियों को लेकर भी अपनी राय रखी।
सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब इराक और सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के विरूद्ध लड़ाई में अमेरिका की अगुवायी वाली गठबंधन सेना में अपनी भागीदारी में बढ़ोतरी कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 22 सदस्यीय अरब लीग ने ट्रंप के मुस्लिम बहुल देशों के खिलाफ अप्रवासी नीति से संबंधित कार्यकारी आदेश पर कल गहरी भचता व्यक्त करते हुये कहा था कि यह प्रतिबंद्ध अनुचित है।
बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम के साथ गणतंत्र दिवस समारोह सम्पन्न
