
तेलंगाना सीएम की सांसद बेटी के. कविता ने कहा, देश के साथ खड़ा हो बॉलीवुड

हैदराबाद। तेलगांना मुख्यमंत्री बेटी और टीआरएस सांसद के. कविता ने ‘ए दिले मुश्किल’ में पाकिस्तानी कलाकार फवाद को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में बयान दिया है।
सऊदी अरब में फंसे भारतीयों ने स्वदेश लौटना शुरू किया

नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि सऊदी अरब में हजारों की संख्या में फंसे बेरोजगार भारतीय श्रमिकों ने स्वदेश लौटना शुरू कर दिया है। विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह सऊदी अरब के दौरे पर हैं जो पूरे अभियान की देखरेख कर रहे हैं।
SC ने सुब्रत राय की पैरोल 28 नवंबर तक बढ़ाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की पैरोल 28 नवंबर तक बढ़ा दी है। न्यायालय ने कहा है कि इस अवधि तक कंपनी 200 करोड़ रुपये जमा कराएं।
रोडमैप में सहारा ने कहा है कि 7,700 करोड़ रुपये मूलधन बकाया है। वो जनवरी से शुरु कर 24 महीने में इसे वापस कर देंगे।
वहीं, सेबी के मुताबिक सहारा को मूलधन के रूप में 25781.32 करोड़ चुकाना है, जिसमें 13,333.80 करोड़ रुपये चुकाया जा चुका है। अब 17 अक्तूबर तक 12447.52 करोड रुपये बकाया है।
इससे पहले सहारा समूह ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि वह शीर्ष अदालत के पूर्व के आदेश के अनुरूप भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 200 करोड़ रुपये जमा कराएगा। इसके साथ ही समूह ने मामले में सुनवाई की तारीख पहले करने की अपील की।
सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति ए आर दवे तथा न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर की पीठ से कहा कि 200 करोड़ रुपये की राशि 24 अक्तूबर तक जमा करानी थी, लेकिन इसे कल जमा करा दिया जाएगा। इस पर पीठ ने कहा, ‘हमें यह जानकर खुशी होगी’। सिब्बल के साथ अधिवक्ता केशव मोहन भी सहारा समूह की पैरवी के लिए मौजूद थे। सिब्बल ने पीठ से अपील की कि इस मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर के बजाय कल की जाए। 24 अक्तूबर की तारीख पीठ पहले तय कर चुकी है। इस पर पीठ ने कहा कि हम इस आग्रह को मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचाएंगे।
सेबी-सहारा विवाद की सुनवाई तीन जजों मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दवे और न्यायमूर्ति ए के सीकरी की पीठ कर रही है। अदालत ने इससे पहले 28 सितंबर को सहारा को 24 अक्तूबर तक 200 करोड़ रुपये और जमा कराने का निर्देश देते हुए राय और दो अन्य निदेशकों को पैरोल पर रिहा करने के अंतरिम आदेश को बढ़ा दिया था’।
सलाहुद्दीन बोला- पाक आर्मी साथ दे तो कश्मीर को ‘आजाद’ करा लेंगे

इस्लामाबाद। कश्मीरी अलगाववादी नेता और आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदिन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन ने जम्मू एवं कश्मीर को भारत से अलग करने में मदद करने के लिए पाकिस्तान से ‘सैन्य समर्थन’ देने का आग्रह किया है। एक पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक सलाहुद्दीन ने कहा, ‘कश्मीर मुद्दा वार्ताओं या प्रस्तावों के जरिए हल होने नहीं जा रहा है। पाकिस्तान को चाहिए कि वह मुजाहिदीनों को संसाधन उपलब्ध कराकर कश्मीरियों का सैन्य समर्थन करे।’
हिज्बुल मुजाहिदिन जैसे खतरनाक आतंकी संगठन के मुखिया सलाहुद्दीन का यह बयान पाकिस्तान के उस दावे की भी पोल खोलता है जिसमें वह कहता रहा है कि उसकी जमीन से आतंकी गतिविधियों को समर्थन नहीं दिया जाता। आतंकी संगठन के आका जिस तरह से पाकिस्तानी आर्मी के बारे में बात करते हैं, उससे इस बात को और मजबूती मिलती है कि वहां की सेना आतंकियों की मदद करती रही है। इस बार युनाइटेड जिहाद काउंसिल (UGC) के चेयरमैन सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, ‘अगर मुजाहिदीन को सैन्य समर्थन मिलता है तो न केवल कश्मीरी आजादी हासिल करेंगे, बल्कि उपमहाद्वीप का नक्शा भी बदल जाएगा।’
सलाहुद्दीन ने विस्तारपूर्वक बताने से इनकार कर दिया कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों को किस तरह के सैन्य समर्थन की जरूरत है, जहां अलगाववादी साल 1989 से अभियान चला रहे हैं, जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं। भारत आरोप लगाता रहा है कि जम्मू एवं कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए पाकिस्तान आतंकियों को प्रशिक्षण, धन और हथियार दे रहा है। पाकिस्तान कहता है कि वह विद्रोहियों को केवल राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देता है। वर्षो से पाकिस्तान में रह रहे सलाहुद्दीन ने कहा, ‘जब दुनिया हमलोगों पर ध्यान नहीं दे रही है, तब हमलोगों के लिए सशस्त्र संघर्ष ही एकमात्र विकल्प बचा है।’
सलाहुद्दीन ने भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का भी मजाक बनाया और कहा कि इंडियन आर्मी में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि वह लाइन ऑफ कंट्रोल पार कर सके। मूल रूप से जम्मू एवं कश्मीर के बडगाम जिले का रहने वाला सलाहुद्दीन साल 1987 में जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा के चुनाव में हार गया था। इसके बाद में वह पाकिस्तान चला गया। सैयद सलाहुद्दीन आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ-साथ युनाइटेड जिहाद कौंसिल का भी प्रमुख है। इस संगठन के तहत अलगाववादियों को पाकिस्तान का समर्थन मिलता है।