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पति दफ्तर जाने की तैयारी कर रहा था कि

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पति दफ्तर जाने की तैयारी में है पत्नी भोजन बनाने में लगी है |

पति – सुनती हो, खाना तैयार कब होगा ?

पत्नी – दो घण्टे से कह रही हूं कि दस मिनट में तैयार हो जायेगा |

महिला टैक्सी ड्राइवर से – जच्चाखाने चलो |

टैक्सी ड्राइवर बहुत तेज टैक्सी चलाने लगा तो महिला ने कहा – अरे मूर्ख ! मैं वहॉं केवल काम करती हूं |

पत्नी – अजी क्या सच है कि रूपये-पैसे बोलते है ?

पति – हॉं, कहते तो ऐसा ही है |

पत्नी – तो, फिर मुझे पैसे दे जाना, मै घर में अकेली बैठी बोर होती रहती हूं

एक पति-पत्नी बस मे यात्रा कर रहे थे | पास ही एक हसीन युवती खड़ी थी |

एकाएक युवती ने घूमकर पति को तमाचा मारा- “बदमाश ! चुटकी क्यों काट रहा था |

बेचारा पति भौंचक्का रह गया |

बस से उतरने के बाद उसने अपनी बीवी से कहा – राजू की मॉं मैने उसे चुटकी नहीं काटी थी |

पत्नी – कोई बात नही | तुम्हें सबक सिखाने के लिए मैंने ही उसे चुटकी काटी थी |

पति – सुनो, हम पिछली बार दिल्ली के कौनसे होटल में ठहरे थे |

पत्नी – ठहरों मैं अभी चम्मचों को देखकर बताती हूं |

पति – क्या तुम वहा कि चम्मचों के फोटो लाई हो ?

पत्नी – नहीं ! ,…………… मैं वहां चार चम्मच उठा लाई ?

सोनु -यार , मैं अगर गधा होता तो क्या तुम भी दोस्ती के खातिर गधे बन जाते ?

मोनू- गधा तो नहीं बनता , पर दोस्ती की खातिर तुम्हें घास जरूर खिलाता

लडकी -जल्दी-जल्दी चलकर आई और टैक्सी में बैठ कर बोली ड्राइवर जल्दी टैक्सी भगाओ ,मुझे जरूरी काम है

ड्राइवर -पर मेम साहब , यह तो मेरी टैक्सी है | इसे क्यों भगाऊं ?

लड्की- गुस्से से चीखी -तो मुझे ही भगा कर ले चलो |

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पुरुषों के वक्षस्थल में उभारों का इलाज आसान

How to get rid of man boobs Fast & easiest Gynecomastia treatment
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नई दिल्ली। वक्षस्थल में दो उभार, यानी स्तन वृद्धि के कारण अब युवकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक आसान सर्जरी से इसका इलाज संभव है।

आतंकित संस्कृति और कर्म फल

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सबगुरु न्यूज। व्यक्ति और समाज पर जब नकारात्मक मूल्य भारी पडने लगते हैं तो उस समय भौतिक ओर अभौतिक संस्कृति भी आतंकित हो जाती हैं तथा वह अपना मूल गुण धर्म बदलने लगती है। यह बदलते मूल्यों की संस्कृति अपने कर्म चयन के अनुसार ही भूमिका निभाते हुए कर्म फल को भी उसी अनुसार प्रभावित कर देती है। कर्म फल जब प्रभावित होता है तो उसमें अभौतिक संस्कृति के गुणों की झलक बहुत कम दिखाई देती है, सारे गुण भौतिक संस्कृति के ही होते हैं।

बदलता हुआ यह सांस्कृतिक विलम्बन समाज में संघर्ष पैदा कर देता हैं और समाज में मूल्य, व्यवहार, प्रतिमान आचार, विचार, आस्था, धर्म और विश्वास यह सब अपने अस्तित्व खोने लगते हैं। एक ऐसे समाज का निर्माण होता है जहां व्यक्ति व समाज खुद को सर्वेसर्वा  घोषित कर देता हैं। इस समाज में न तो अपनापन होता है और न ही हम की भावना। यही सामाजिक विचलन समाज को बदल देता है और अभौतिक संस्कृति की आस्था विश्वास कुचल दी जाती हैं।

नकारात्मक मूल्यों की ये संस्कृति अपने साथ आतंकित मूल्यों को लेकर एक नहीं अनेक रावणों, कंसों और भारी दुर्योधनो को जन्म देती हैं। एक भारी अहंकार सर्वत्र गूंजने लगता है, अंत में यह सभी आपस मे टकराते हुए खत्म हो जाते हैं। आतंकित संस्कृति का यह कर्म फल विकास को विनाश की ओर ले जाता है और सब कुछ चौपट हो जाता है। नकारात्मक मूल्यों की बस यही हार हो जाती हैं।

यहीं कृष्ण रूपी शक्ति का उदय होता है जो संशय में पडे अर्जुन को एक ऐसे सत्य की ओर ले जाती है, उसके ह्रदय में ज्ञान की ज्योति जला कर उसे सकारात्मक कर्म के चयन का ज्ञान सिखलाती है। व्यक्ति और समाज को एकजुट कर नकारात्मक मूल्यों की संस्कृति को खत्म करतीं हैं और एक ऐसे समाज का निर्माण करती हैं जहां मानव में हम की भावना पैदा होती है।

संत जन कहते हैं कि हे मानव तू सकारात्मक सोच से ही कर्म कर ताकि मूल्य, व्यव्हार, प्रतिमान, आचार विचार, आस्था, धर्म, विश्वास सभी आसानी से तेरे कर्म फल को आतंकित नहीं होने देंगे और समाज विनाश से विकास की ओर बढ जाएगा।

सौजन्य : भंवरलाल

मार्गशीर्ष मास मोक्षदायक व कल्याणप्रद

Margashirsha shukla ekadasi or mokshada ekadasi
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सबगुरु न्यूज। शिवपुराण की शतरूद्र संहिता की मान्यता के अनुसार इस मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शिव ने भैरव रूप में अवतार लिया था। इसलिए यह काल भैरव अष्टमी कहलाती हैं। आज भैरवजी की उपासना की जाती है।

हनीमून के लिए समुद्र तटीय स्थल पहली पसंद : सर्वे

Survey says Seaside site is first choice for honeymoon by Couple
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नई दिल्ली। शादी के मौसम की शुरुआत के साथ ज्यादातर प्रेमी जोड़े हनीमून के लिए समुद्र तटीय स्थलों की तलाश करते हैं और उनकी बुकिंग कर रहे हैं। यह जानकारी एक सर्वेक्षण से सामने आई है।