
मुंबई। वर्ष 1910 में मुंबई में फिल्म’द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’ के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों की भीड़ में एक ऐसा शख्स भी था जिसे फिल्म देखने के बाद अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया था और उसने लगभग दो महीने के अंदर शहर में प्रदर्शित सारी फिल्में देख डाली और निश्चय कर लिया वह फिल्म निर्माण ही करेगा। यह शख्स और कोई नही भारतीय सिनेमा के जनक दादा साहब फाल्के थे।